
Samajwadi Party: समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका! कई बड़े नेताओं ने थामा सुभासपा का दामन, संगठन में 30 से ज्यादा पदाधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने संगठन विस्तार को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने राष्ट्रीय, प्रदेश और क्षेत्रीय स्तर पर बड़े बदलाव करते हुए कई नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस कदम को आगामी चुनावों और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का दावा है कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और विभिन्न वर्गों तक पार्टी की पहुंच और प्रभाव बढ़ेगा। वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कई नेता और पदाधिकारी सुभासपा के साथ जुड़ते दिखाई दिए हैं।
पार्टी द्वारा जारी नई सूची के अनुसार बिजनौर निवासी सहाबुद्दीन अंसारी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं देवरिया की सुनीता राजभर को महिला मंच का राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव बनाया गया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि महिला भागीदारी को मजबूत करने और संगठन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा औरैया के सीपीपी निषाद को युवा मंच का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है जबकि सहारनपुर के उस्मान अहमद को युवा मंच का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। पार्टी युवाओं को जोड़ने के लिए लगातार युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सुभासपा ने व्यापारी और अल्पसंख्यक वर्ग को साधने की दिशा में भी अहम कदम उठाए हैं। गाजियाबाद के सतीश कुमार अग्रवाल को व्यापार प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं आजमगढ़ के जावेद आलम को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा अमरोहा के बलिराज प्रजापति, आजमगढ़ के संतोष सिंह और सत्येंद्र प्रताप सिंह को प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। पार्टी का मानना है कि इन नेताओं के अनुभव से संगठन को नई मजबूती मिलेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को मजबूत करने के लिए भी पार्टी ने बड़ा दांव खेला है। हापुड़ के दीपक चौहान को पश्चिमांचल युवा मंच का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं मैनपुरी के शत्रुघ्न पाल, राजेंद्र सिंह राठौर और फिरोजाबाद के प्रदीप कुमार परमार को भी संगठन में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि नए पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी आएगी और आगामी चुनावों में इसका सीधा फायदा पार्टी को मिल सकता है।






