
NEET UG 2026: पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द, सरकार ने CBI जांच और दोबारा एग्जाम का किया ऐलान
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा को लेकर देशभर में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद अब सरकार ने दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई है। सरकार ने साफ कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही या धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
एनटीए के निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि 7 मई को एजेंसी को कुछ अहम रिपोर्ट और इनपुट मिले थे। इन रिपोर्ट्स में परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि एजेंसी ने इन आरोपों की गहन जांच की और कई आरोप सही पाए गए। इसी के बाद यह फैसला लिया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जाएगा और इसलिए NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों से कोई नई फीस नहीं ली जाएगी। जिन छात्रों ने पहले फीस जमा की थी, उनकी फीस वापस की जाएगी या उसे अगली परीक्षा के लिए मान्य माना जाएगा। एनटीए ने कहा है कि नई परीक्षा की तारीख और एडमिट कार्ड का संशोधित शेड्यूल जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट और अन्य माध्यमों से जारी किया जाएगा। लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर अब नई परीक्षा तिथियों पर टिकी हुई है।
पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद कई राज्यों में जांच शुरू हुई थी। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने सीकर और जयपुर समेत कई जिलों में छापेमारी कर कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी जांच एजेंसियों ने कथित पेपर लीक नेटवर्क को लेकर जांच शुरू की। आरोप लगे थे कि परीक्षा से पहले कुछ लोगों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिए गए थे।
एजुकेटर्स फेडरेशन दिल्ली के अध्यक्ष केशव अग्रवाल ने दावा किया कि कथित लीक पेपर और असली परीक्षा के लगभग 140 सवाल मेल खाते दिखे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल सवालों की समानता के आधार पर अदालत में पेपर लीक साबित करना आसान नहीं होगा, क्योंकि अभी तक असली पेपर की बरामदगी या इलेक्ट्रॉनिक लीक का स्पष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। इसके बावजूद छात्रों और अभिभावकों में परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
पेपर लीक विवाद के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार और एनटीए पर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर छात्रों ने बड़े स्तर पर परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। कई छात्र संगठनों ने प्रदर्शन भी किए और कहा कि यदि निष्पक्ष परीक्षा नहीं कराई गई तो लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।
एनटीए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि परीक्षा रद्द करने का फैसला छात्रों के हित और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बनाए रखने के लिए लिया गया है। एजेंसी ने भरोसा दिलाया कि CBI जांच में पूरा सहयोग दिया जाएगा और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएंगे। अब पूरे देश में इस मामले पर नजर बनी हुई है और छात्र नई परीक्षा की तारीखों का इंतजार कर रहे हैं।






