
Bengaluru Wall Collapse: अस्पताल परिसर की दीवार गिरने से 7 की मौत, सीएम सिद्धारमैया ने घायलों से की मुलाकात
बेंगलुरु में एक दर्दनाक हादसे ने शहर को झकझोर कर रख दिया, जहां बॉवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल के पास एक कंपाउंड की दीवार गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल हैं, जबकि सात अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार यह हादसा भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण हुआ। बताया जा रहा है कि बारिश से बचने के लिए कुछ लोग दीवार के पास खड़े हो गए थे, तभी अचानक दीवार भरभराकर गिर गई और सभी लोग उसके मलबे में दब गए। पुलिस के मुताबिक, सभी मृतक रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले लोग थे, जो रोजमर्रा की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए तुरंत अभियान चलाया गया, लेकिन तब तक सात लोगों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि सभी घायलों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और उनके इलाज की जानकारी ली। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सात लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है।
सीएम सिद्धारमैया ने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने इस घटना की जांच के आदेश भी दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दीवार गिरने के पीछे क्या कारण थे और भविष्य में ऐसे हादसों को कैसे रोका जा सकता है।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस कमिश्नर से बात की है और अपनी बैठक बीच में छोड़कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी और जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा एक बार फिर शहर में बुनियादी ढांचे की स्थिति और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे समय में जब मौसम की मार से कमजोर संरचनाएं खतरा बन सकती हैं। प्रशासन अब इस पूरे मामले की जांच में जुट गया है ताकि जिम्मेदारों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।






