
Cyber Crime: म्यूल अकाउंट सप्लाई गैंग का भंडाफोड़, 10 आरोपी गिरफ्तार, बैंक खाते उपलब्ध कराकर साइबर ठगी को देते थे बढ़ावा
पूर्वी जिला पुलिस की साइबर ईस्ट थाना टीम ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित म्यूल अकाउंट सप्लाई गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 11 पीओएस मशीनें, 27 चेक बुक, 17 एटीएम कार्ड और 12 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देने में मदद कर रहा था।
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार के अनुसार, मामले का खुलासा केरल निवासी जिजी शाइन के साथ हुई दो लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान हुआ। पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद साइबर ईस्ट थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगी की रकम यस बैंक के एक खाते में ट्रांसफर की गई थी, जिसे म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बाद पुलिस ने वित्तीय ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया।
जांच के दौरान सामने आया कि यह नेटवर्क साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने का संगठित कारोबार चला रहा था। मामले की तह तक पहुंचने के लिए साइबर ईस्ट थाना पुलिस ने विशेष टीम का गठन किया। टीम ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक लेन-देन की जांच और विभिन्न स्थानों पर फील्ड वेरिफिकेशन के जरिए गिरोह के सदस्यों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी दिलाने या आसान कमाई का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद आरोपी उन खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, चेक बुक, मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की पूरी जानकारी अपने कब्जे में ले लेते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगों को किराये या कमीशन के आधार पर उपलब्ध कराया जाता था, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम को जमा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय कुमार, प्रदीप कुमार, यतेन्द्र कुमार, मुकेश, विनेश, गुरबाज सिंह, अमन, सूरज यादव, गौरव नाहर और लक्ष्मण के रूप में हुई है। सभी आरोपी दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले हैं। पुलिस अब इनके आपराधिक रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह अत्याधुनिक तरीके से काम करता था। साइबर ठगी से प्राप्त रकम को पीओएस मशीनों, एटीएम कार्डों और मोबाइल फोन के माध्यम से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके। इस प्रक्रिया के जरिए साइबर अपराधियों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो जाता था।
जांच एजेंसियां अब उन साइबर ठगों और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्होंने इन म्यूल खातों का इस्तेमाल कर देशभर में लोगों को ठगी का शिकार बनाया। पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई अन्य बड़े साइबर अपराध मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
पूर्वी जिला पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेक बुक, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें। साथ ही किसी भी लालच, नौकरी के प्रस्ताव या कमीशन के बदले अपने बैंक खाते का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति को न करने दें। ऐसा करना न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है बल्कि कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को देने की अपील की है।
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