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Faridabad BK Civil Hospital: लिफ्ट बंद होने के बीच मरीज की मौत, अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

Faridabad BK Civil Hospital: लिफ्ट बंद होने के बीच मरीज की मौत, अस्पताल पर लापरवाही के आरोप

फरीदाबाद के बीके सिविल अस्पताल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान फैज अहमद के रूप में हुई है, जो सेक्टर-23 स्थित संजय कॉलोनी में किराए के मकान में अकेले रहते थे। इस घटना के बाद उनके साथ आए मकान मालिक और पड़ोसियों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

जानकारी के अनुसार, फैज अहमद की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनके मकान मालिक और पड़ोसी उन्हें तुरंत इलाज के लिए बीके सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने मरीज को तीसरी मंजिल पर बने हृदय केंद्र (हार्ट सेंटर) में दिखाने की सलाह दी। इसी दौरान एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

मरीज को तीसरी मंजिल पर ले जाने के लिए जब परिजन ओपीडी की लिफ्ट के पास पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि लिफ्ट काम नहीं कर रही है। मरीज की हालत पहले से ही नाजुक थी, ऐसे में मजबूरी में उसे रैंप के रास्ते ऊपर ले जाने का फैसला किया गया। परिजनों का आरोप है कि मरीज को तीसरी मंजिल तक ले जाते समय उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

मृतक के साथ आए गोपाल राय और अन्य लोगों का कहना है कि अगर लिफ्ट चालू होती तो मरीज को समय पर इलाज मिल सकता था और शायद उसकी जान बच जाती। उनका आरोप है कि अस्पताल में लिफ्ट बंद होने के कारण उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ा, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ और अंततः यह हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि फैज अहमद का परिवार बिहार में रहता है और वह फरीदाबाद में अकेले रहकर काम करते थे। उनकी तबीयत खराब होने पर आसपास के लोगों ने ही जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया था। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और आपातकालीन सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, मौके पर जाकर देखने पर लिफ्ट चालू हालत में पाई गई, लेकिन परिजनों के आरोपों के आधार पर यह मामला जांच का विषय बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष देखा जा रहा है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही का उदाहरण बन सकता है।

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