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Delhi Encroachment: फुटपाथों पर बढ़ते कब्जों पर सख्त हुआ दिल्ली हाई कोर्ट, चीफ सेक्रेटरी को आपात बैठक बुलाने के निर्देश

Delhi Encroachment: फुटपाथों पर बढ़ते कब्जों पर सख्त हुआ दिल्ली हाई कोर्ट, चीफ सेक्रेटरी को आपात बैठक बुलाने के निर्देश

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फुटपाथों और बाजारों में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राजधानी के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार बढ़ रही अव्यवस्था और भीड़भाड़ को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए अदालत ने दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि स्ट्रीट वेंडिंग व्यवस्था को लेकर हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं और सरकारी एजेंसियों की निर्णयहीनता ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए पाया कि स्ट्रीट वेंडरों, तहबाजारी धारकों और दुकानदारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। अदालत ने कहा कि विभिन्न एजेंसियां वेडिंग योजनाओं को अंतिम रूप देने और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल रही हैं, जिसके चलते कई बाजारों में अराजक स्थिति पैदा हो गई है।

29 मई को पारित आदेश में कोर्ट ने दिल्ली सरकार के चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया कि वह 2 जून को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं बल्कि दुकानदारों, फेरीवालों और वेंडर संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए ताकि सभी पक्ष अपनी समस्याएं और सुझाव सामने रख सकें।

कोर्ट ने इस बैठक को समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। अदालत का मानना है कि बिना सभी पक्षों को सुने इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि राजधानी में फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते कब्जों से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नई दिल्ली नगर पालिका परिषद यानी एनडीएमसी क्षेत्र में वेडिंग योजनाएं अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई हैं। सैकड़ों वेडिंग साइटों को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है और हजारों स्ट्रीट वेंडर अस्थायी प्रमाणपत्रों के आधार पर काम कर रहे हैं।

वहीं नगर निगम दिल्ली यानी एमसीडी क्षेत्रों की स्थिति और भी जटिल बताई गई। अदालत को बताया गया कि यहां सर्वे की प्रक्रिया तक पूरी नहीं हो सकी है और करीब 13 हजार से ज्यादा कथित अवैध कब्जाधारियों ने नियामक प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं लिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने खासतौर पर कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, सरोजिनी नगर, करोल बाग और लाजपत नगर जैसे बड़े कारोबारी इलाकों का जिक्र किया, जहां फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। अदालत ने कहा कि इन इलाकों में लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

अब सभी की नजर 2 जून को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी हुई है। हाई कोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को निर्देश दिया है कि बैठक में सभी पक्षों से चर्चा कर आगे की रणनीति तैयार की जाए और उसकी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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