
Air India AI-171 Crash: एआई-171 हादसे पर नई बहस, पायलट संगठन ने बिजली की खराबी को बताया दुर्घटना की वजह
नई दिल्ली। एयर इंडिया की बोइंग 787 ड्रीमलाइनर फ्लाइट एआई-171 के अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने दुर्घटना से जुड़ी आधिकारिक अंतरिम जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि विमान दुर्घटना की वजह पायलटों की गलती नहीं, बल्कि विमान के सिस्टम में हुई गंभीर बिजली संबंधी खराबी हो सकती है। संगठन ने अपने दावों के समर्थन में नए सिम्युलेटर परीक्षणों और तकनीकी आंकड़ों का हवाला दिया है।
गौरतलब है कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे ने देश और दुनिया के विमानन क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि विमान के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई जानबूझकर बंद किए जाने के कारण यह हादसा हुआ। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया था कि यह कदम फ्लाइट क्रू द्वारा उठाया गया हो सकता है।
हालांकि अब फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने इस निष्कर्ष को चुनौती दी है। एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा कि संगठन द्वारा किए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षणों के नतीजे आधिकारिक रिपोर्ट के निष्कर्षों से मेल नहीं खाते। उनके अनुसार परीक्षणों में विमान के वास्तविक वजन, संतुलन और मौसम संबंधी परिस्थितियों को दोहराया गया था ताकि दुर्घटना के समय की स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।
कैप्टन रंधावा का कहना है कि यदि किसी विमान में मैन्युअल रूप से फ्यूल सप्लाई बंद की जाती है तो रैम एयर टर्बाइन (RAT) को सक्रिय होने में लगभग 18 सेकेंड का समय लगता है। जबकि आधिकारिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह बैकअप पावर सिस्टम केवल चार सेकेंड में सक्रिय हो गया था। एफआईपी के अनुसार यह समय अंतर तकनीकी और भौतिक दृष्टि से संभव नहीं है।
रैम एयर टर्बाइन विमान का एक महत्वपूर्ण बैकअप सिस्टम होता है, जो विमान की मुख्य बिजली आपूर्ति पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में स्वतः सक्रिय होकर आवश्यक प्रणालियों को सीमित ऊर्जा उपलब्ध कराता है। एफआईपी का तर्क है कि इतनी कम अवधि में इसका सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि विमान में इंजन बंद होने से पहले ही व्यापक बिजली आपूर्ति बाधित हो चुकी थी।
संगठन का दावा है कि विमान में किसी बड़ी विद्युत या इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली की खराबी हुई थी, जिसके कारण इंजन नियंत्रण प्रणाली प्रभावित हुई और फ्यूल स्विच स्वतः ट्रिप हो गए। इसके परिणामस्वरूप विमान नियंत्रण खो बैठा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
एफआईपी ने अपने दावे के समर्थन में दुर्घटना से बचे एकमात्र यात्री के बयान का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार यात्री ने बताया था कि विमान के अंतिम क्षणों में केबिन की लाइटें बार-बार टिमटिमा रही थीं और उनकी रोशनी कम हो रही थी। पायलट संगठन का कहना है कि यह स्थिति विमान में अचानक हुई बिजली आपूर्ति की गंभीर समस्या की ओर संकेत करती है।
पायलट संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में पहले से कुछ विद्युत संबंधी तकनीकी समस्याएं दर्ज थीं, जिनकी पर्याप्त जांच नहीं की गई। एफआईपी का कहना है कि इन पहलुओं को जांच में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और दुर्घटना के कारणों की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हुई।
कैप्टन रंधावा ने आरोप लगाया कि भारत के अनुभवी बोइंग 787 विशेषज्ञ कैप्टन आर.एस. संधू को जांच प्रक्रिया से दूर रखा गया। उनके अनुसार यदि विशेषज्ञों की राय को पूरी तरह शामिल किया जाता तो कई तकनीकी पहलू सामने आ सकते थे। संगठन का मानना है कि मृत पायलटों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय दुर्घटना के तकनीकी कारणों की गहराई से जांच की जानी चाहिए।
एफआईपी ने बताया कि उसने अपने सिम्युलेटर परीक्षणों के परिणाम और तकनीकी विश्लेषण बोइंग तथा संबंधित सरकारी विमानन प्राधिकरणों को सौंप दिए हैं। संगठन ने मांग की है कि अंतिम दुर्घटना रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी तकनीकी विसंगतियों और वैकल्पिक संभावनाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए।
इस बीच विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान दुर्घटना की अंतिम वजह निर्धारित करने के लिए ब्लैक बॉक्स डेटा, फ्लाइट रिकॉर्डर, तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण आवश्यक होता है। ऐसे में अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक दुर्घटना के कारणों को लेकर कोई भी निष्कर्ष अंतिम नहीं माना जा सकता।
एआई-171 हादसे को लेकर सामने आए इन नए दावों ने जांच प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें जांच एजेंसियों और विमानन नियामकों पर टिकी हैं कि वे इन नए तकनीकी दावों की किस प्रकार समीक्षा करते हैं और अंतिम रिपोर्ट में किन निष्कर्षों तक पहुंचते हैं।






