
Baby Trafficking Case: अंतरराज्यीय शिशु तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 13 आरोपी गिरफ्तार, पांच नवजात बच्चों को सुरक्षित बचाया
नई दिल्ली, 18 जून। दिल्ली पुलिस ने शिशु तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑपरेशन यूनिट की इस कार्रवाई में पांच नवजात और शिशुओं को सुरक्षित बरामद किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह दिल्ली के अलावा हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला हुआ था और निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये लेकर अवैध तरीके से नवजात बच्चों की बिक्री करता था।
गिरफ्तार आरोपियों में शिशु तस्कर, बिचौलिए, बच्चे खरीदने वाले लोग और एक निजी अस्पताल की संचालक भी शामिल है। पुलिस का आरोप है कि अस्पताल के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनी रूप देने की कोशिश की जा रही थी। मामले में थाना पहाड़गंज में एफआईआर संख्या 258/2026 दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा 5 जून को मिली गुप्त सूचना के आधार पर हुआ। पुलिस को जानकारी मिली थी कि आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास कुछ लोग एक नवजात शिशु का सौदा करने वाले हैं। सूचना की पुष्टि के बाद ऑपरेशन यूनिट ने डिकॉय ग्राहक बनाकर आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
कार्रवाई के दौरान ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित को एक नवजात बच्चे को बेचने की कोशिश करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने चार-पांच दिन के एक नवजात बालक को सुरक्षित बचाया और डिकॉय ग्राहक के जरिए दिए गए 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद की।
पूछताछ और तकनीकी जांच में पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपी एक संगठित अंतरराज्यीय शिशु तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं। यह गिरोह अलग-अलग राज्यों से नवजात बच्चों को हासिल करता था और फिर उन्हें निःसंतान दंपतियों को मोटी रकम लेकर बेच देता था। जांच में सामने आया कि गिरोह की मुख्य संचालक ज्योति उर्फ कमलेश थी, जो विभिन्न राज्यों में मौजूद बिचौलियों के माध्यम से बच्चों की व्यवस्था करती थी।
पुलिस जांच में राजस्थान और गुजरात से बच्चों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख सप्लायर सायबाभाई घामर उर्फ कालीया की भूमिका भी सामने आई। लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने उसे 17 जून को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वह राजस्थान और गुजरात के अलग-अलग इलाकों से नवजात बच्चों को गिरोह तक पहुंचाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने प्रतिभा और विपिन को भी गिरफ्तार किया, जो एक अन्य नवजात बच्चे की खरीद-फरोख्त की तैयारी में थे। इनके कब्जे से 2.92 लाख रुपये बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नवजात बच्चे को खरीदने के लिए किया जाना था।
इस मामले में बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, अस्पताल का इस्तेमाल कथित तौर पर तस्करी कर लाए गए बच्चों को रखने और संभावित खरीदारों से संपर्क कराने के लिए किया जाता था। आरोप है कि अस्पताल के माध्यम से जन्म प्रमाण पत्र, डिलीवरी रिकॉर्ड और अन्य चिकित्सा दस्तावेजों में हेरफेर कर बच्चों की फर्जी अभिभावकता स्थापित करने की कोशिश की गई।
पुलिस ने इस कार्रवाई में कुल पांच बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है। इनमें एक नवजात बालक दिल्ली से, दो शिशु जिसमें एक बालक और एक बालिका शामिल हैं, ग्वालियर मध्य प्रदेश से तथा दो बालक पानीपत हरियाणा से बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, बचाए गए पांच बच्चों में से चार आदिवासी परिवारों से संबंधित हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का है।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह बच्चों को कथित तौर पर 1.5 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक में खरीदता था और उन्हें 6 लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक की कीमत में बेच देता था। पुलिस के अनुसार, एक बच्चे का सौदा करीब 6 लाख रुपये और दो अन्य बच्चों का सौदा लगभग 9 लाख रुपये में किए जाने की जानकारी मिली है।
पुलिस ने इस मामले में ज्योति उर्फ कमलेश, शालू, ललित, प्रतिभा, विपिन, ओमवती, डॉ. विवेकी, मुकेश-रीमा पाल, सनी अरोड़ा-ऋतु अरोड़ा, सायबाभाई घामर उर्फ कालीया और सरिका समेत कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
बरामद किए गए सभी पांचों बच्चों को पुलिस ने बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया है। समिति के निर्देशों के अनुसार बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है।
सेंट्रल जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस अब बरामद बच्चों के जैविक माता-पिता की पहचान करने और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बच्चों की बरामदगी की संभावना है।





