
Mayur Vihar Student Death: मयूर विहार के स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा की मौत, आपातकालीन सहायता पर परिजनों के सवाल
पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार स्थित निजी स्कूल में तीसरी कक्षा की एक छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार बच्ची कक्षा में गिर पड़ी थी। शिक्षक और स्कूल कर्मचारी उसे अस्पताल ले गए, जहां से आगे उपचार के लिए दूसरे अस्पताल भेजा गया। निर्माण विहार के मलिक अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। घटना से परिवार और स्कूल समुदाय में शोक है।
बताया गया है कि बच्ची के गिरने पर कक्षा अध्यापिका ने उसे उठाकर बेंच पर बैठाया और उसके बाद स्कूल के कर्मचारी चिकित्सा सहायता के लिए निकले। बच्ची को पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, फिर उसकी स्थिति को देखते हुए रेफर किया गया। घटनाक्रम के सटीक समय, प्राथमिक सहायता और अस्पतालों तक पहुंचने की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
परिवार ने स्कूल की आपातकालीन तैयारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त फीस देने के बावजूद जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय मदद की उचित व्यवस्था दिखाई नहीं दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते सीपीआर नहीं दिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
स्कूल की प्रिंसिपल ने कथित तौर पर मौत का कारण हार्ट फेल होना बताया और कहा कि स्कूल बच्चों की देखभाल करता है। सीपीआर की उपलब्धता और स्टाफ के प्रशिक्षण के बारे में उनसे पूछे गए सवालों पर सामने आए कथित जवाब भी चर्चा का विषय बने हैं। हालांकि बातचीत का पूरा संदर्भ और स्कूल की लिखित प्रतिक्रिया उपलब्ध हुए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
बच्ची की मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण मेडिकल रिपोर्ट तथा संबंधित जांच से ही तय हो सकेगा। इसी तरह यह भी स्पष्ट होना आवश्यक है कि गिरने के तुरंत बाद क्या कदम उठाए गए, क्या प्राथमिक उपचार उपलब्ध था, एंबुलेंस या अन्य वाहन कब बुलाया गया और अस्पताल पहुंचने में कितना समय लगा। परिवार की शिकायतों और स्कूल प्रबंधन के पक्ष को जांच में समान रूप से परखा जाना चाहिए।
इस घटना ने विद्यालयों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी को लेकर व्यापक प्रश्न उठाए हैं। किसी बच्चे के अचानक बेहोश होने या सांस तथा हृदय संबंधी आपातस्थिति में प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी और तत्काल सहायता की प्रक्रिया अहम होती है। सीपीआर तथा प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण और नियमित अभ्यास आपातकालीन प्रतिक्रिया को बेहतर बना सकते हैं।
स्कूलों में फर्स्ट एड किट, स्पष्ट आपातकालीन संपर्क सूची, अभिभावकों को तुरंत सूचना देने की व्यवस्था और निकटवर्ती अस्पताल तक पहुंचने की कार्ययोजना होना महत्वपूर्ण है। साथ ही यह देखना जरूरी है कि शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को आपातस्थिति पहचानने तथा सहायता बुलाने के लिए किस स्तर तक प्रशिक्षित किया गया है।
अब संबंधित शिक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के तथ्यों की जांच तथा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की अपेक्षा की जा रही है। परिवार को जवाब मिलने और घटना के कारण स्पष्ट होने के साथ भविष्य के लिए ठोस सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।






