
Delhi Pollution: दिल्ली-NCR की हवा बेहद खराब, कई स्थानों पर AQI 400 के पार; GRAP-2 के प्रतिबंध लागू
दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। राजधानी में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 494 तक पहुंचने से वातावरण की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। दिल्ली के अलावा नोएडा और एनसीआर के कई अन्य इलाकों में भी AQI 400 के पार दर्ज किया गया है। निरंतर बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को देखते हुए हवा की गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के दूसरे चरण को लागू कर दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत प्रदूषण को नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कई प्रतिबंधात्मक और एहतियाती उपाय किए जाएंगे।
GRAP-2 लागू होने के बाद दिल्ली-NCR में प्रदूषण पर अंकुश के उपायों को और सख्त किया जाएगा। इस व्यवस्था के अंतर्गत पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय किए जाएंगे, ताकि निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम किया जा सके और लोग सार्वजनिक परिवहन की ओर रुख करें। सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में बदलाव जैसे उपायों पर भी अमल किया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दिल्ली मेट्रो मंगलवार से प्रतिदिन 20 अतिरिक्त फेरे लगाएगी। इसका उद्देश्य यात्रियों को अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध कराना और सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम करना है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में नमी अधिक रहने की वजह से प्रदूषक कण वातावरण से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। हवा का प्रभावी प्रवाह नहीं होने से प्रदूषण जमीन के नजदीक जमा हो रहा है, जिससे कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। ऐसी परिस्थितियों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी तत्व हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं। इसके चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के कुल प्रदूषण में लगभग 31 प्रतिशत योगदान स्थानीय स्रोतों का है, जबकि करीब 69 प्रतिशत प्रदूषण बाहरी क्षेत्रों से आ रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि राजधानी में प्रदूषण की समस्या केवल स्थानीय गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से आने वाले प्रदूषक तत्व भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में दिल्ली के साथ-साथ पूरे एनसीआर में समन्वित तरीके से प्रदूषण पर अंकुश के उपाय लागू करना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि त्योहारों के मौसम और पराली जलाने की घटनाओं की वजह से आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा के रुख के अनुसार दिल्ली-NCR तक पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, मौसम में बदलाव और हवा की कम गति की वजह से प्रदूषण लंबे समय तक वातावरण में बना रह सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती होगी।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचने की अपील की है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से परेशान लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करने और प्रदूषण कम करने में सहयोग देने की भी अपील की गई है। अभी दिल्ली-NCR के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है और GRAP-2 के तहत उठाए जाने वाले कदमों से प्रदूषण पर कितना नियंत्रण हो पाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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