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Khagaria Bus Fire: NH-31 पर चलती यात्री बस में लगी भीषण आग, 50-60 तीर्थयात्रियों ने कूदकर बचाई जान

Khagaria Bus Fire: NH-31 पर चलती यात्री बस में लगी भीषण आग, 50-60 तीर्थयात्रियों ने कूदकर बचाई जान

खगड़िया। बिहार के खगड़िया जिले में शनिवार तड़के एक बड़ा हादसा टल गया। मानसी थाना क्षेत्र में एनएच-31 पर अनिल होटल के पास नेपाल से गया जा रही तीर्थयात्रियों से भरी एक यात्री बस में अचानक भीषण आग लग गई। बस में करीब 50 से 60 तीर्थयात्री सवार थे। बस से धुआं और आग की लपटें निकलते देख यात्रियों ने समय रहते नीचे उतरकर अपनी जान बचा ली। कुछ ही देर में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और बस जलकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

जानकारी के मुताबिक, यह बस नेपाल से श्रद्धालुओं को लेकर गया जी जा रही थी। यात्रियों का उद्देश्य पितृपक्ष के दौरान गया पहुंचकर पिंडदान करना था। बस जब मानसी थाना क्षेत्र में एनएच-31 से गुजर रही थी, तभी उसमें अचानक धुआं उठने लगा। यात्रियों को जैसे ही किसी गड़बड़ी का एहसास हुआ, उन्होंने शोर मचाना शुरू किया और बस को रुकवाकर बाहर निकलने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि बस के एक हिस्से से पहले धुआं निकलता दिखाई दिया था। धुआं बस के भीतर भी फैलने लगा, जिससे यात्रियों के बीच घबराहट की स्थिति पैदा हो गई। स्थिति बिगड़ती देख यात्रियों ने बिना समय गंवाए बस से बाहर निकलना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में यात्री होने के बावजूद सभी लोग समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे।

यात्रियों के बस से उतरने के कुछ ही देर बाद आग तेजी से फैल गई। देखते ही देखते बस आग की लपटों से घिर गई और कुछ समय में उसका अधिकांश हिस्सा जल गया। आग इतनी भीषण थी कि बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। सड़क पर बस को जलता देखकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई और एनएच-31 पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने की कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ-साथ घटनास्थल की स्थिति को नियंत्रित किया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी यात्री की मौत या गंभीर चोट की सूचना सामने नहीं आई।

मानसी थाना पुलिस के अनुसार, आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में बस के एक पहिए से धुआं उठने और तकनीकी खराबी के कारण आग लगने की आशंका सामने आई है। कुछ यात्रियों ने भी आग लगने से पहले असामान्य धुएं और गंध महसूस होने की बात बताई। हालांकि, आग की सही वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस और संबंधित टीम अब बस की तकनीकी स्थिति की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि आग किस हिस्से से शुरू हुई और कुछ ही मिनटों में उसने इतनी तेजी से बस को कैसे अपनी चपेट में ले लिया। बस में लगे उपकरणों, वायरिंग और अन्य तकनीकी हिस्सों की भी जांच की जा सकती है, ताकि हादसे की वास्तविक वजह सामने आ सके।

हादसे के समय बस में सवार यात्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजी से फैलती आग से बाहर निकलने की थी। यात्रियों ने स्थिति को भांपते हुए समय रहते बस छोड़ दी, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की जान बच गई। यदि आग तेजी से फैलने से पहले यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती थी।

बस में सवार सभी यात्री नेपाल से गया जी जा रहे थे। पितृपक्ष के दौरान गया में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में नेपाल से भी श्रद्धालुओं का एक दल बस से गया जा रहा था। घटना के बाद यात्रियों के आगे के सफर की व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

आग की घटना के बाद एनएच-31 पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। जलती बस को देखने और राहत-बचाव कार्य के कारण सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और यातायात व्यवस्था को सामान्य कराने की कोशिश की।

इस घटना ने लंबे सफर पर चलने वाली यात्री बसों की तकनीकी जांच और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। खासकर तीर्थयात्रियों और लंबी दूरी की बसों में आग जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन उपकरण और नियमित तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बस में आग लगने की वजह, घटना से पहले वाहन की स्थिति और आग फैलने के क्रम से जुड़े सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है। राहत की बात यही रही कि समय रहते सभी 50 से 60 तीर्थयात्रियों को बस से बाहर निकाल लिया गया और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

 

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