
Delhi Zero Waste Colonies: कचरा मुक्त दिल्ली की ओर कदम, 1200 से अधिक कॉलोनियों को ‘जीरो वेस्ट’ बनाने की तैयारी
दिल्ली को कचरा मुक्त बनाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से नगर निगम ने नई पहल आरंभ की है। दिल्ली नगर निगम (MCD) के इस अभियान के तहत राजधानी में जीरो वेस्ट कॉलोनियों की संख्या बढ़ाकर 1200 से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके उद्देश्य से निगम ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 से ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए लोगों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को कचरे के उचित निस्तारण, गीले और सूखे कचरे को विभिन्न रखने तथा कचरे के पुनर्चक्रण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
निगम के अनुसार, दिल्ली में अभी तक 823 से अधिक कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी के रूप में घोषित किया जा चुका है। इस संख्या को बढ़ाने के उद्देश्य से 400 से अधिक ऐसी संभावित कॉलोनियों और आरडब्ल्यूए को चिह्नित किया गया है, जहां बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है। इन कॉलोनियों को जीरो वेस्ट मॉडल अपनाने के उद्देश्य से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत संबंधित आरडब्ल्यूए और निगम के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की पहल की गई है, ताकि कचरे के प्रबंधन को लेकर जिम्मेदारियां तय की जा सकें और स्थानीय स्तर पर व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
महापौर प्रवेश वाही ने जानकारी दी कि निगम निरंतर कॉलोनियों और आरडब्ल्यूए को जीरो वेस्ट व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। रिफॉर्म उत्सव 2026 के माध्यम से लोगों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमावली के बारे में भी ब्योरा साझा किया जा रही है। निगम की कोशिश है कि कचरे को केवल इकट्ठा करके दूसरी जगह भेजने के बजाय उसके निस्तारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था को कॉलोनी स्तर पर मजबूत किया जाए। इससे कचरे का बेहतर प्रबंधन करने और स्वच्छता अभियान में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
एमसीडी की पर्यावरण प्रबंधन सेवाएं (DEMS) समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने भी कार्यक्रम के समय कचरे के प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया। इस अभियान के अंतर्गत लोगों को घटनास्थल पर ही कचरे को विभिन्न करने और उसके प्रसंस्करण की प्रक्रिया के बारे में ब्योरा साझा किया जा रही है। गीले कचरे से खाद तैयार करने, सूखे कचरे को पुनर्चक्रण के उद्देश्य से भेजने और अन्य कचरे का उचित तरीके से निस्तारण करने जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका मकसद कचरे को बिना प्रसंस्करण के लैंडफिल साइटों तक पहुंचने से रोकना और ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना है।
दिल्ली में कचरा प्रबंधन लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। शहर में रोजाना कई हजार टन कचरा पैदा होता है, जिसके संग्रहण, परिवहन और निस्तारण के उद्देश्य से व्यापक व्यवस्था की जरूरत होती है। कई इलाकों में कूड़े के ढेर और पुराने ढलावों पर बढ़ता दबाव स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावित करता है। ऐसे में कॉलोनियों को जीरो वेस्ट मॉडल से जोड़ना कचरे को स्रोत पर ही अलग करने, स्थानीय स्तर पर उसके प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हालाँकि, केवल कॉलोनियों को जीरो वेस्ट घोषित करना ही पर्याप्त नहीं होगा। इस व्यवस्था को लंबे समय तक बनाए रखने के उद्देश्य से नियमित निगरानी, नागरिकों की भागीदारी, समय पर कचरा संग्रहण और प्रसंस्करण की उचित सुविधाएं जरूरी होंगी। पहले भी जीरो वेस्ट घोषित कुछ कॉलोनियों में निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में एमसीडी की नई पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निगम और आरडब्ल्यूए मिलकर कचरे के पृथक्करण और निस्तारण की व्यवस्था को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं। यदि यह मॉडल निरंतर प्रभावी बना रहता है, तो दिल्ली को स्वच्छ बनाने और लैंडफिल पर दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।






