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NDMC Roadmap: एलजी तरनजीत सिंह संधू ने विश्वस्तरीय दिल्ली के लिए चार स्तंभों पर दिया जोर

NDMC Roadmap: एलजी तरनजीत सिंह संधू ने विश्वस्तरीय दिल्ली के लिए चार स्तंभों पर दिया जोर

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए राजधानी को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया। उन्होंने NDMC के कर्मचारियों के साथ संवाद किया, चाणक्यपुरी की अनुपम कॉलोनी में जीरो-वेस्ट मॉडल क्षेत्र का दौरा किया और धर्म मार्ग स्थित डेंटल केयर क्लिनिक में दंत स्वास्थ्य जागरूकता एवं निवारक मौखिक स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन किया।

NDMC कन्वेंशन सेंटर में कर्मचारियों के साथ संवाद के दौरान उपराज्यपाल ने सफाई कर्मचारियों, मालियों, इंजीनियरों, विद्युत एवं रखरखाव कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को साफ, हरा-भरा और व्यवस्थित बनाए रखने में अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन्हें शहर के वास्तविक ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताते हुए उनकी सुरक्षा, गरिमा, कल्याण और संस्थागत सहयोग को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उपराज्यपाल ने NDMC को ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली देश का सिर्फ प्रशासनिक केंद्र नहीं है, बल्कि दुनियाभर से आने वाले लोगों के लिए भारत की पहली छवि भी प्रस्तुत करती है। ऐसे में राजधानी की साफ-सफाई, हरियाली, सड़कों की स्थिति, सार्वजनिक सुविधाओं और समग्र रखरखाव का सीधा संबंध शहर की पहचान से है।

उन्होंने विश्वस्तरीय दिल्ली के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा भी सामने रखी। इनमें महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित सड़कों का निर्माण, बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग और डार्क स्पॉट खत्म करना, पिंक फोर्स की तैनाती, एआई आधारित त्वरित नागरिक सेवाएं, जीरो-वेस्ट पड़ोस विकसित करना और जनभागीदारी को बढ़ावा देना शामिल है। इन पहलों को उन्होंने बेहतर शहरी सेवाओं और नागरिक जीवन की गुणवत्ता से जोड़ा।

एलजी ने कहा कि सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी, शिकायतों की प्रभावी निगरानी और समयबद्ध सेवा वितरण से नागरिकों को सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल सकती हैं। इसी के साथ वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटान और स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वच्छता और कचरा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

कर्मचारियों के साथ बातचीत के दौरान कई व्यावहारिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों ने चिकित्सा सुविधाओं, कार्यस्थल और आसपास महिलाओं की सुरक्षा, सफाई व्यवस्था में मशीनीकरण, तकनीक के इस्तेमाल के कारण रोजगार को लेकर बनी आशंकाओं, कार्यस्थल पर मनोरंजन सुविधाओं और कैंटीन की जरूरत जैसे विषय उठाए। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए नए आवास की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। उपराज्यपाल ने कर्मचारियों से जुड़े इन विषयों को सुना और संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं को समझने पर जोर दिया।

सरदार तरनजीत सिंह संधू ने नई दिल्ली में आयोजित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान NDMC की कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि BRICS शिखर सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों के दौरान स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं के उच्च मानकों को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों में बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ रोजमर्रा के नागरिक जीवन में भी उसी स्तर की सेवाओं को लगातार बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत 100 प्रतिशत स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक घर और संस्थान के स्तर पर गीले और सूखे कचरे को अलग करने की व्यवस्था टिकाऊ कचरा प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कचरे के वैज्ञानिक निपटान, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की संभावनाओं को मजबूत किया जा सकता है।

इसके बाद उपराज्यपाल ने चाणक्यपुरी स्थित अनुपम कॉलोनी का दौरा किया, जिसे जीरो-वेस्ट मॉडल क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों से बातचीत की और कॉलोनी में 100 प्रतिशत स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण तथा मौके पर ही कम्पोस्टिंग के प्रयासों की जानकारी ली।

अनुपम कॉलोनी की व्यवस्था को नागरिक भागीदारी का उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय यदि कचरा अलग करने, जैविक कचरे की कम्पोस्टिंग और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाता है, तो इससे पड़ोस को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें केवल एक कॉलोनी तक सीमित न रहें, बल्कि दिल्ली के अन्य इलाकों में भी इस तरह के मॉडल को अपनाने की दिशा में काम होना चाहिए।

जीरो-वेस्ट मॉडल को विस्तार देने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि समुदाय आधारित कचरा प्रबंधन से कचरे की मात्रा कम करने, लैंडफिल पर दबाव घटाने और स्थानीय स्तर पर कचरे के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। अनुपम कॉलोनी के उदाहरण को उन्होंने यह दिखाने वाला मॉडल बताया कि नागरिक स्वयं बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा बनें तो टिकाऊ शहरी व्यवस्था को स्थानीय स्तर से मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम के तीसरे चरण में उपराज्यपाल ने डिप्लोमैटिक एन्क्लेव के धर्म मार्ग स्थित डेंटल केयर क्लिनिक में डेंटल हेल्थ अवेयरनेस और प्रिवेंटिव ओरल हेल्थ कैंप का उद्घाटन किया। यहां उन्होंने दंत विशेषज्ञों से बातचीत की तथा लोगों के लिए तैयार किए गए जागरूकता स्टॉलों का निरीक्षण किया।

शिविर में मौखिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी उपलब्ध कराई गई। इनमें मुंह और दांतों की सामान्य देखभाल, वरिष्ठ नागरिकों के लिए जेरियाट्रिक डेंटल केयर, तंबाकू सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान और कैंसर के प्रति जागरूकता, बच्चों के मौखिक स्वास्थ्य तथा आधुनिक 3D डेंटल केयर तकनीक जैसे विषय शामिल थे। शिविर का उद्देश्य बीमारी होने के बाद इलाज कराने के बजाय समय रहते निवारक देखभाल और नियमित मौखिक स्वच्छता के महत्व को बढ़ावा देना रहा।

इन कार्यक्रमों के दौरान NDMC अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल, विधायक एवं NDMC सदस्य वीरेंद्र सिंह कादियान, परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि और सरिता तोमर, सचिव राहुल सिंह, वित्तीय सलाहकार राकेश सिंह, वरिष्ठ अधिकारी तथा NDMC कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान शहरी स्वच्छता, नागरिक सेवाओं, कर्मचारियों के कल्याण, जीरो-वेस्ट प्रबंधन और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए।

नई दिल्ली में आयोजित इस दौरे के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी स्तर की नागरिक भागीदारी के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिखाई दिया। एक ओर NDMC के कर्मचारियों की भूमिका और उनकी कार्य परिस्थितियों पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर अनुपम कॉलोनी के जरिए नागरिकों की भागीदारी से कचरा प्रबंधन के मॉडल को सामने रखा गया। इसके साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मौखिक स्वच्छता और निवारक दंत चिकित्सा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल भी कार्यक्रम का हिस्सा रही।

 

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