
Goa Night Club Fire Case: फर्जी क्लीयरेंस पर चल रहा क्लब, ईडी ने 17 करोड़ की संपत्ति जब्त की
गोवा के अरपोरा स्थित चर्चित नाइट क्लब में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। इस हादसे में 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसके बाद अब यह साफ हो गया है कि क्लब पूरी तरह से नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था।
ईडी के अनुसार, ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाम का यह नाइट क्लब बिना जरूरी फायर सेफ्टी एनओसी के ही चलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, क्लब संचालकों ने फर्जी पुलिस क्लीयरेंस और जाली दस्तावेजों के सहारे इसे कानूनी रूप देने की कोशिश की थी। इस गंभीर लापरवाही और धोखाधड़ी के चलते ही इतना बड़ा हादसा हुआ, जिसमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
प्रवर्तन निदेशालय के पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 17.45 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। जांच में सामने आया कि क्लब के संचालक सौरभ लूथरा और अन्य साझेदारों ने मिलकर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया था।
ईडी ने बताया कि इस मामले की जांच अंजुना और मापुसा पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये एफआईआर न सिर्फ 6 दिसंबर 2025 को हुए अग्निकांड से जुड़ी हैं, बल्कि लाइसेंस और एनओसी हासिल करने के लिए किए गए जालसाजी के मामलों को भी उजागर करती हैं।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ‘बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अरपोरा एलएलपी’ नाम की संस्था द्वारा इस क्लब का संचालन किया जा रहा था, जिसने आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां लिए बिना ही इसे चलाना जारी रखा। खासतौर पर फायर सेफ्टी एनओसी जैसी जरूरी अनुमति तक नहीं ली गई थी, जो किसी भी नाइट क्लब के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
ईडी के अनुसार, क्लब के साझेदारों ने विभिन्न सरकारी अधिकारियों के सामने फर्जी स्वास्थ्य एनओसी और पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जैसे जाली दस्तावेज पेश किए, ताकि प्रतिष्ठान को वैध दिखाया जा सके। यह पूरी साजिश योजनाबद्ध तरीके से की गई थी, जिसमें नियमों की खुलकर अनदेखी की गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस क्लब का व्यापार लाइसेंस 31 मार्च 2024 को ही समाप्त हो चुका था और इसके बाद भी इसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बावजूद क्लब को लगातार चलाया जाता रहा, जो कि कानून का सीधा उल्लंघन है।
वित्तीय जांच में यह भी सामने आया कि अवैध रूप से संचालित इस क्लब ने भारी कमाई की। वित्तीय वर्ष 2023-24 से लेकर 6 दिसंबर 2025 तक इसने करीब 29.78 करोड़ रुपये की आय अर्जित की, जिसे ईडी ने ‘अपराध की आय’ के रूप में चिन्हित किया है। इसके अलावा करीब 2 करोड़ रुपये का अलग से राजस्व भी सामने आया है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कैसे इतने बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी होती रही और संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब ईडी की कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।






