
Indians Still in Iran: करीब 1000 भारतीय ईरान में फंसे, 23 हजार छात्र खाड़ी देशों में परीक्षा से वंचित
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के बीच भारत के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। संसद की स्थायी समिति की बैठक में यह जानकारी सामने आई कि करीब एक हजार भारतीय अभी भी ईरान में फंसे हुए हैं। इन लोगों में जरूरी नहीं कि सभी अपनी मर्जी से वहीं रहना चाहते हों, लेकिन मौजूदा हालात और सुरक्षा कारणों के चलते उनका वहां से वापस आना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
वहीं, खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 23 हजार छात्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की अंतिम परीक्षाओं में शामिल नहीं हो सके। इससे उनके शैक्षणिक करियर पर गंभीर असर पड़ सकता है। समिति के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय से इस समस्या के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में पूछा। उन्हें बताया गया कि विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है।
बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, संघर्ष का प्रभाव, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों की स्थिति और तेल-गैस आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण मुददों पर विस्तार से चर्चा हुई। सांसदों ने कई सवाल उठाए, लेकिन सभी सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिल सके। विशेष रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की निंदा करने और वहां हुई नागरिक हत्याओं पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए। हालांकि, विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद नहीं थे। समिति ने यह भी चर्चा की कि खाड़ी देशों में फंसे छात्रों के लिए वैकल्पिक परीक्षा व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो। यह मुद्दा खासतौर पर तब महत्वपूर्ण हो गया है जब लाखों भारतीय बाहर काम कर रहे हैं और विदेशों में उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी रहती है।
भारत सरकार फिलहाल ईरान में फंसे भारतीयों और खाड़ी देशों में फंसे छात्रों की समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रही है। विदेश मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय की टीमों के बीच निरंतर समन्वय चल रहा है। हालात का असर सिर्फ शिक्षा पर ही नहीं बल्कि भारत के आर्थिक हितों, ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।
अभी तक स्पष्ट नहीं है कि ईरान में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए क्या समयसीमा तय की गई है। सांसदों ने सरकार से कहा कि उन्हें नियमित जानकारी दी जाए और छात्रों और नागरिकों के सुरक्षित निकास के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
देश में और विदेश में फंसे नागरिकों और छात्रों की समस्याओं ने सरकार की विदेश नीति और शैक्षिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना बाकी है कि भारत सरकार इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कितनी तेजी से और प्रभावी कदम उठा पाती है।






