देश

Middle East War: मनामा और यरुशलम में धमाके, दुबई एयरपोर्ट पर गिरा मिसाइल मलबा, आठवें दिन भी जारी तनाव

Middle East War: मनामा और यरुशलम में धमाके, दुबई एयरपोर्ट पर गिरा मिसाइल मलबा; आठवें दिन भी जारी तनाव

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव का आज आठवां दिन है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध जैसे माहौल में धकेल दिया है। इस बीच बहरीन की राजधानी मनामा और यरुशलम में जोरदार धमाकों की खबर सामने आई है, जबकि दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास मिसाइल का मलबा गिरने से कुछ समय के लिए उड़ानों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

दरअसल यह तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान की राजधानी तेहरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया। इस ऑपरेशन को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने इजरायल और कई खाड़ी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार शुरू कर दी, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से बढ़ गया।

संयुक्त राष्ट्र ने इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता जताई है। यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए तो यह संघर्ष किसी के भी नियंत्रण से बाहर जा सकता है। उन्होंने सभी देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

मौजूदा संघर्ष के दौरान तेहरान से लेकर तेल अवीव तक कई जगहों पर मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं। शनिवार तड़के तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाके हुए, जिनकी आवाज आसपास के इलाकों में भी सुनाई दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार धमाकों के कारण आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक हिल गईं और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इजरायली वायुसेना ने तेहरान में कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इजरायल का दावा है कि इस अभियान में लगभग 50 से 80 फाइटर जेट शामिल थे। इन हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान के सर्वोच्च नेता के परिसर के नीचे बने भूमिगत बंकर और सैन्य ठिकाने थे। इजरायल ने कहा है कि इन हमलों को मिलिट्री इंटेलिजेंस की सटीक जानकारी और खुफिया एजेंसी मोसाद के समन्वय से अंजाम दिया गया।

वहीं अमेरिका ने भी इस संघर्ष में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। यूनाइटेड स्टेट्स ने मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश तैनात करने का फैसला किया है। इससे पहले से मौजूद दो अन्य एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ यह तैनाती अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैयारी को दर्शाती है।

इजरायल और अमेरिका का दावा है कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। इजरायली सेना का कहना है कि उसने ईरान की लगभग 80 प्रतिशत हवाई रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया है। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है और ड्रोन हमलों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संघर्ष को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत तभी संभव होगी जब वह बिना शर्त सरेंडर करेगा। ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के अनुसार यह संघर्ष चार से छह सप्ताह तक जारी रह सकता है।

दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि कुछ देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें शुरू की हैं और ईरान हमेशा शांति के लिए प्रतिबद्ध रहा है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने से पीछे नहीं हटेगा।

इस बीच खाड़ी देशों में भी कई जगह मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। बहरीन के एक औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सरकारी तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई, हालांकि बाद में उस पर काबू पा लिया गया।

संघर्ष के बढ़ते खतरे को देखते हुए हजारों विदेशी नागरिक मिडिल ईस्ट छोड़कर जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि करीब 20 हजार अमेरिकी नागरिक इस क्षेत्र से निकल चुके हैं, जबकि जो लोग अभी भी वहां फंसे हैं उन्हें निकालने के लिए चार्टर उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है।

इसी दौरान इजरायली सेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी बड़े पैमाने पर बमबारी की है। सेना का दावा है कि इन हमलों में कमांड सेंटर, बहुमंजिला इमारतें और ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स को निशाना बनाया गया।

लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को जल्द से जल्द रोकने की अपील कर रहा है, क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति इसी तरह बढ़ती रही तो यह क्षेत्रीय संघर्ष वैश्विक संकट का रूप भी ले सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button