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Ram Mandir Row: राम मंदिर ‘चंदा चोरी’ प्रदर्शन पर राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद समेत नेताओं पर FIR दर्ज

Ram Mandir Row: राम मंदिर ‘चंदा चोरी’ प्रदर्शन पर राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद समेत नेताओं पर FIR दर्ज

वाराणसी, 1 अगस्त : संसद परिसर में राम मंदिर को लेकर हुए ‘चंदा चोरी’ प्रदर्शन का मामला अब कानूनी विवाद में बदल गया है। वाराणसी के कोतवाली थाने में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई संत समाज की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें प्रदर्शन के दौरान धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार, पातालपुरी पीठाधीश्वर बालकदास के नेतृत्व में संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोतवाली थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि संसद परिसर में किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान सनातन धर्म, भगवान राम और संत समाज की छवि को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह पूरा विवाद 31 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दिन INDIA गठबंधन के सांसद संसद के मकर द्वार के निकट अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा संग्रह और उसके उपयोग में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र, रुद्राक्ष की माला और पुजारी के वेश में नजर आए। उनके सामने भगवान राम की तस्वीर और एक दान पेटी रखी गई थी। प्रदर्शन में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्ष के कई नेताओं ने प्रतीकात्मक रूप से दान पेटी में पैसे डालकर विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने कथित रूप से दान पेटी से नकदी निकालकर अपनी जेब में रखी और दान पेटी लेकर जाने का प्रतीकात्मक प्रयास किया। विपक्ष का कहना था कि यह प्रदर्शन राम मंदिर में कथित चंदा गड़बड़ी के आरोपों का प्रतीक था। वहीं प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव के बीच भी नाटकीय बहस और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति देखने को मिली। इस दौरान “चंदा चोर” और “गद्दी छोड़” जैसे नारे भी लगाए गए।

वाराणसी के संत समाज ने इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भगवा वस्त्र धारण कर पुजारी को चोर के रूप में प्रस्तुत करना करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इस तरह का प्रदर्शन भगवान राम, सनातन परंपरा और संत समाज का सार्वजनिक अपमान है, इसलिए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोतवाली थाने में प्राप्त शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच के दौरान संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

उधर, विपक्षी दलों का कहना है कि उनका प्रदर्शन राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को उठाने के लिए था और इसका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आस्था का अपमान करना नहीं था। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

 

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