
DTC Bus Strike: दिल्ली में ड्राइवर-कंडक्टरों की हड़ताल से बस सेवा प्रभावित, वेतन बढ़ोतरी और मेडिकल-बीमा सुविधा की मांग
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में DTC के कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर और कंडक्टर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में बसें सड़कों पर नहीं उतर सकीं और डिपो में खड़ी रहीं। इसका सीधा असर रोजाना DTC बसों से सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ा है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल सुविधा और जीवन एवं दुर्घटना बीमा जैसी मांगों पर समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
हड़ताल की वजह से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में यात्रियों को बसों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। कई बस स्टैंड पर लोग घंटों बस आने का इंतजार करते दिखाई दिए। बस सेवा प्रभावित होने के कारण ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और अस्पताल जाने वाले लोगों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।
कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवरों का कहना है कि मौजूदा वेतन में दिल्ली जैसे शहर में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों के मुताबिक, उन्हें करीब 22 हजार रुपये प्रति माह मिलते हैं। उनका दावा है कि महंगाई और काम की जिम्मेदारी को देखते हुए मौजूदा भुगतान पर्याप्त नहीं है।
एक कॉन्ट्रैक्ट ड्राइवर ने दावा किया कि उन्हें प्रतिदिन 862 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मांग है कि दैनिक भुगतान बढ़ाकर 1500 रुपये किया जाए। कर्मचारियों ने स्थायी और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के वेतन में अंतर का मुद्दा भी उठाया है।
वेतन बढ़ोतरी के अलावा कर्मचारियों की प्रमुख मांग मेडिकल सुविधाओं से जुड़ी है। प्रदर्शनकारी ड्राइवरों और कंडक्टरों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं देने की मांग भी की है।
कर्मचारियों का कहना है कि बस चलाने के दौरान उन्हें सड़क दुर्घटनाओं सहित कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनके और उनके परिवारों के लिए मेडिकल तथा बीमा सुरक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक हड़ताल जारी रखने की बात कही है।
DTC बसों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर दिखाई दिया जो रोजाना कम किराए में बसों से सफर करते हैं। बसों की उपलब्धता कम होने के कारण यात्रियों को ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी और दूसरे निजी परिवहन साधनों की तरफ जाना पड़ा।
कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि हड़ताल के दौरान कुछ ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक किराया मांगा। यात्रियों के मुताबिक, जिन स्थानों तक सामान्य दिनों में करीब 20 रुपये में पहुंच जाते थे, वहां जाने के लिए कुछ जगह 100 रुपये या उससे अधिक की मांग की गई।
कुछ रूटों पर यात्रियों ने 50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक किराया मांगे जाने की शिकायत की। पालम जैसे इलाकों के लिए कुछ यात्रियों ने 250 से 300 रुपये तक किराया बताए जाने का दावा किया। हालांकि किराए से संबंधित ये आंकड़े यात्रियों द्वारा बताए गए अनुभवों पर आधारित हैं और अलग-अलग रूट पर स्थिति अलग हो सकती है।
हड़ताल का असर केवल नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों ने दावा किया कि ऑटो का किराया अधिक होने के कारण उन्हें साइकिल जैसे साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा। बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाने वाले परिवारों के लिए भी बस सेवा प्रभावित होना परेशानी का कारण बना।
कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थानों में जाने वाले छात्रों को भी बसों की कमी से दिक्कत हुई। कई छात्रों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। इससे उनके रोजाना यात्रा खर्च में भी बढ़ोतरी हुई।
दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा की यात्रा के लिए सार्वजनिक बस सेवा पर निर्भर हैं। ऐसे में DTC बसों की उपलब्धता प्रभावित होने से दूसरे सार्वजनिक और निजी परिवहन साधनों पर दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में यात्रियों की भीड़ और वैकल्पिक साधनों की मांग अधिक दिखाई दी।
प्रदर्शनकारी ड्राइवर और कंडक्टर अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वेतन बढ़ोतरी के साथ मेडिकल, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाओं को लेकर ठोस कदम उठाया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
फिलहाल हड़ताल के चलते दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर असर बना हुआ है। बस सेवा पर निर्भर यात्रियों की नजर इस बात पर है कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या समाधान निकलता है और DTC बसों का संचालन कब पूरी तरह सामान्य होता है।






