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Plastic Waste Management: एनडीएमसी ने शुरू की ‘डी.आर.ओ.पी.’ पहल, नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

Plastic Waste Management: एनडीएमसी ने शुरू की ‘डी.आर.ओ.पी.’ पहल, नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली में प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वच्छ भारत मिशन, मिशन लाइफ (LiFE) और विकसित भारत @2047 के विजन को आगे बढ़ाते हुए एनडीएमसी ने ‘डी.आर.ओ.पी.’ (Develop Responsible Outlook for Plastic) परियोजना का शुभारंभ किया है। इस पहल का उद्देश्य प्लास्टिक अपशिष्ट के संग्रहण, पृथक्करण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को मजबूत बनाना तथा नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।

एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने किआ इंडिया और इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने पुनर्चक्रित प्लास्टिक कचरे से निर्मित विशेष सामुदायिक कूड़ेदानों का लोकार्पण किया और प्लास्टिक कचरा संग्रहण वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही नई दिल्ली क्षेत्र में प्लास्टिक कचरे के व्यवस्थित संग्रहण और पुनर्चक्रण की नई व्यवस्था की शुरुआत हो गई।

कार्यक्रम में एनडीएमसी परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि, आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग, आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल, किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल सूद, एनडीएमसी की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन (एमटीए) और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि एनडीएमसी के लिए यह गर्व की बात है कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत वाल्मीकि बस्ती से की थी। उन्होंने कहा कि भले ही एनडीएमसी क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से छोटा हो, लेकिन इसके अंतर्गत संसद भवन, केंद्रीय मंत्रालय, विदेशी दूतावास और कई राष्ट्रीय महत्व के संस्थान आते हैं। ऐसे में यहां शुरू की गई प्रत्येक पर्यावरणीय और स्वच्छता पहल का प्रभाव राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचता है।

 

 

उन्होंने बताया कि एनडीएमसी वर्ष 2021 से आईपीसीए के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। इस साझेदारी के तहत अब तक 115 एरोबिन स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से 62,958 किलोग्राम गीले कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया और 10,013 किलोग्राम कम्पोस्ट तैयार किया गया। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए अब डी.आर.ओ.पी. परियोजना के तहत पूरे एनडीएमसी क्षेत्र में प्लास्टिक कचरा संग्रहण के लिए विशेष डिब्बे लगाए जाएंगे।

परियोजना के अंतर्गत प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, परिवहन, पृथक्करण और अधिकृत पुनर्चक्रण चैनलों के माध्यम से उसके निस्तारण की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा। इससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ लैंडफिल साइटों पर बढ़ते दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।

कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि डी.आर.ओ.पी. परियोजना स्वच्छ भारत, मिशन लाइफ और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी पहल साबित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जन-जागरूकता, नागरिक भागीदारी और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से यह परियोजना नई दिल्ली को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एनडीएमसी परिषद सदस्य अनिल वाल्मीकि ने किआ इंडिया और आईपीसीए की सराहना करते हुए कहा कि राजधानी के केंद्र में प्लास्टिक कचरे की चुनौती से निपटने के लिए यह एक प्रभावी पहल है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरा न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। उन्होंने नागरिकों से घरों में प्लास्टिक कचरे का पृथक्करण करने और उसके उचित निस्तारण में सहयोग देने की अपील की।

किआ इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतुल सूद ने कहा कि तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किआ इंडिया जिम्मेदार प्लास्टिक कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने और व्यवहारगत परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। डी.आर.ओ.पी. परियोजना के माध्यम से एक ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है जिसे भविष्य में देश के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकेगा।

आईपीसीए के सचिव अजय गर्ग ने प्लास्टिक प्रदूषण को देश की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक बताते हुए कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार, संस्थानों और नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा। वहीं आईपीसीए की उपनिदेशक डॉ. राधा गोयल ने परियोजना की कार्यप्रणाली, इसके संभावित प्रभाव और अन्य शहरों में विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में आरडब्ल्यूए और एमटीए के प्रतिनिधियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और इस पहल को सफल बनाने में सहयोग का भरोसा जताया। एनडीएमसी के स्वच्छता, उद्यान और सिविल अभियांत्रिकी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल नई दिल्ली के निर्माण के लिए सभी स्तरों पर सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं।

डी.आर.ओ.पी. परियोजना के शुभारंभ के साथ एनडीएमसी ने प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक नई शुरुआत की है। यह पहल न केवल राजधानी को स्वच्छ और हरित बनाने में मदद करेगी, बल्कि पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।

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