
NSUI Protest: कनॉट प्लेस में दिल्ली पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच झड़प, महिला प्रदर्शनकारियों से धक्का-मुक्की का वीडियो आया सामने
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में NSUI का प्रदर्शन मंगलवार को कनॉट प्लेस में तनावपूर्ण हो गया। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर सात के पास छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। महिला कार्यकर्ताओं और महिला पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की के आरोप भी सामने आए हैं।
NSUI कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारे लगा रहे थे। मौके पर दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बल के जवान भी मौजूद थे। प्रदर्शन नियंत्रित करने के दौरान दोनों पक्षों में तनाव बढ़ने की जानकारी दी गई है। एक वीडियो में महिला प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन पूरे घटनाक्रम और विवाद की शुरुआत की स्वतंत्र पुष्टि अभी जरूरी है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में NSUI कनॉट प्लेस में धरना जारी रखेगी। उनके अनुसार, संगठन बुधवार और गुरुवार को भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। NSUI ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध जारी रखने की बात कही है।
टकराव के बाद कुछ कार्यकर्ता कनॉट प्लेस थाने के बाहर भी पहुंचे और कथित मारपीट के विरोध में नारे लगाए। आरोप है कि एक महिला पुलिसकर्मी ने NSUI की कार्यकर्ता को थप्पड़ मारा। इसी आरोप को लेकर प्रदर्शनकारियों ने उस वाहन को रोकने की कोशिश की, जिसमें संबंधित महिला पुलिसकर्मी सवार थीं। इस दौरान थाने के बाहर भी तनाव रहा।
NSUI के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडे ने कहा कि संगठन कथित वोट चोरी के मुद्दे पर विरोध जारी रखेगा और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करेगा। मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर संगठन ने जवाबदेही की मांग उठाई है। ये NSUI के आरोप हैं; संबंधित पक्षों का जवाब और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने आनी बाकी है।
इसी दिन कनॉट प्लेस में वामपंथी छात्र संगठनों ने भी प्रदर्शन किया था। जंतर-मंतर पर बैरिकेडिंग के बीच वहां पहुंचने का प्रयास करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी दी गई है। घटनाओं ने राजधानी में प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े किए हैं।






