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KGMU Doctor Case: शादी का झांसा और धर्मांतरण दबाव मामले में डॉ. रमीज की जमानत खारिज

KGMU Doctor Case: शादी का झांसा और धर्मांतरण दबाव मामले में डॉ. रमीज की जमानत खारिज

King George’s Medical University से जुड़े चर्चित शोषण और धर्मांतरण मामले में आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह की अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए मामले को गंभीर और संवेदनशील बताया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की प्रकृति और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा।

मामला KGMU की एक महिला डॉक्टर से जुड़ा है, जिसने आरोपी डॉ. रमीज उर्फ रमीजुद्दीन नायक पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने और बाद में धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाकर महिला डॉक्टर को अपने विश्वास में लिया और उसके साथ संबंध बनाए।

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने शादी की बात की, तब आरोपी ने धर्म परिवर्तन के बाद ही निकाह करने की शर्त रखी। इसी दौरान महिला को आरोपी की पहली पत्नी के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद उसने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी। आरोप है कि इसके बावजूद आरोपी लगातार मानसिक दबाव बनाता रहा।

मामले में यह भी सामने आया कि सितंबर 2025 में पीड़िता को अपनी गर्भावस्था की जानकारी मिली थी। आरोप है कि आरोपी ने उसका गर्भपात कराया। बाद में जब महिला ने दोबारा शादी की बात उठाई, तब फिर से धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी दावा किया गया कि आरोपी अपने परिवार के साथ मिलकर महिलाओं पर धर्म बदलने का दबाव बनाता था। लगातार मानसिक प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और तनाव से परेशान होकर पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को नशीली गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास भी किया था।

घटना के बाद पीड़िता ने अपने पिता को पूरी जानकारी दी और KGMU प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत देने से जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामले की आगे की सुनवाई जारी है।

यह मामला सामने आने के बाद मेडिकल संस्थानों में महिला सुरक्षा, पेशेवर संबंधों में विश्वास और मानसिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजरें इस हाई-प्रोफाइल मामले की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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