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Emergency 1975: आपातकाल की काली रात की यादें, लोकतंत्र की रक्षा में जेल गए थे बटाला के कार्यकर्ता

Emergency 1975: आपातकाल की काली रात की यादें, लोकतंत्र की रक्षा में जेल गए थे बटाला के कार्यकर्ता

पंजाब के बटाला और गुरदासपुर क्षेत्र में वर्ष 1975 के आपातकाल की यादें आज भी कई परिवारों के लिए संघर्ष और बलिदान का प्रतीक हैं। 25 जून 1975 की आधी रात के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा लागू किए गए आपातकाल के दौरान बटाला जिला गुरदासपुर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ से जुड़े अनेक प्रमुख कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था।

बताया जाता है कि श्री देवेन्द्र पाल, श्री जय किशन, श्री देव भूषण, श्री फकीर चंद, श्री मदनलाल, श्री दर्शन लाल, श्री विलैती राम, श्री तिलक राज सहित जनसंघ के कई प्रमुख नेताओं को मीसा (MISA) और डीआईआर (DIR) जैसे कानूनों के तहत गिरफ्तार कर गुरदासपुर और पटियाला की जेलों में बंद कर दिया गया था।

उस दौर में आपातकाल का विरोध करने वाले सत्याग्रही भारी संख्या में सड़कों पर उतरते थे। वे बाजारों में रैलियां निकालकर लोकतंत्र की बहाली और आपातकाल के विरोध में नारे लगाते थे। इसके बाद पुलिस लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज देती थी।

आपातकाल के दौरान कई परिवार ऐसे भी थे जिनके मुखिया जेल में थे। ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कई परिवारों की सहायता और देखभाल की जिम्मेदारी निभाई। उस दौर को याद करने वाले लोगों का कहना है कि वह समय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कठिन और भयावह काल था।

इस अवसर पर मास्टर मुनी लाल, जालंधर ने कहा कि आज देश में जो राजनीतिक परिस्थितियां हैं, वे उन लाखों कार्यकर्ताओं के त्याग और संघर्ष का परिणाम हैं जिन्होंने संगठन और विचारधारा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से समाज, राष्ट्र और जनहित के लिए निरंतर कार्य करते रहने का आग्रह किया।

 

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