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Delhi Transfer Posting: नजफगढ़ में मृत अधिकारी को बना दिया सब-रजिस्ट्रार, ट्रांसफर लिस्ट सामने आने के बाद सर्विसेज विभाग पर उठे सवाल

Delhi Transfer Posting: नजफगढ़ में मृत अधिकारी को बना दिया सब-रजिस्ट्रार, ट्रांसफर लिस्ट सामने आने के बाद सर्विसेज विभाग पर उठे सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सर्विसेज विभाग की ओर से जारी ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची में कथित तौर पर एक मृत अधिकारी को नजफगढ़ का सब-रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग की ओर से हाल ही में बड़ी संख्या में अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की गई थीं। इसी सूची में शिक्षा विभाग से जुड़े रहे राकेश कुमार का नाम भी शामिल कर उन्हें नजफगढ़ में सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनाती दे दी गई, जबकि रिपोर्ट के मुताबिक उनका निधन हो चुका है। मामला सामने आने के बाद ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट रखने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार की सर्विसेज ब्रांच ने 3 सितंबर को डिप्टी सेक्रेटरी (सर्विसेज) जितेन्द्र कुमार अरोड़ा के आदेश के तहत कुल 46 अधिकारियों से संबंधित ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी किए थे। इस सूची में विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों को शामिल किया गया। सूची में क्रम संख्या एक से 39 तक शामिल अधिकारियों को अलग-अलग स्थानों पर सब-रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त किया गया, जबकि बाकी सात अधिकारियों को अगली पोस्टिंग होने तक सर्विसेज विभाग में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया।

मामला तब चर्चा में आया जब सूची में 22वें नंबर पर दर्ज राकेश कुमार की पोस्टिंग पर ध्यान गया। आदेश के मुताबिक राकेश कुमार को शिक्षा विभाग से स्थानांतरित कर नजफगढ़ का सब-रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी का पहले ही निधन हो चुका है। इसके बावजूद उनका नाम सक्रिय अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची में शामिल होने और उन्हें नई जिम्मेदारी दिए जाने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं।

आमतौर पर किसी अधिकारी के तबादले और नई तैनाती से पहले संबंधित विभागों के रिकॉर्ड, मौजूदा पोस्टिंग, सेवा की स्थिति और अन्य प्रशासनिक जानकारियों की जांच की जाती है। ऐसे में मृत अधिकारी का नाम ट्रांसफर सूची में शामिल हो जाना विभागीय रिकॉर्ड के अपडेट और विभिन्न शाखाओं के बीच समन्वय को लेकर सवाल पैदा करता है। यह भी सवाल उठ रहा है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने से पहले संबंधित अधिकारी की वर्तमान सेवा स्थिति की पुष्टि क्यों नहीं हो सकी।

मामला सामने आने के बाद दिल्ली सचिवालय में भी इस प्रशासनिक चूक की चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सर्विसेज विभाग अब इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड और फाइलों की पड़ताल कर रहा है। हालांकि इस चूक के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी और संबंधित अधिकारी का नाम सूची में कैसे शामिल हुआ, इसे लेकर विभाग की ओर से तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

इस ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची से जुड़ा एक और मामला भी चर्चा में है। सूची में 46वें और अंतिम नंबर पर अजय पाल का नाम शामिल है। अजय पाल जनकपुरी में सब-रजिस्ट्रार के पद पर तैनात थे। जारी आदेश के तहत उन्हें जनकपुरी से हटाकर नई पोस्टिंग मिलने तक सर्विसेज विभाग में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था। इसके बाद उन्हें निलंबित किए जाने की बात सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक अजय पाल पर सब-रजिस्ट्रार के पद पर रहते हुए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) से संबंधित ऐसी कार्रवाई करने का आरोप है, जिसे लेकर दिल्ली सरकार पूर्व में आदेश जारी कर चुकी थी। इसी मामले में उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि इसी तरह के मामलों में अन्य अधिकारियों की भूमिका भी रही है तो कार्रवाई केवल एक अधिकारी तक सीमित क्यों रही।

दिल्ली सचिवालय के प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज होने की बात कही जा रही है। संबंधित मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका या उनके खिलाफ किसी संभावित कार्रवाई को लेकर अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला भी जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।

दरअसल, दिल्ली में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या बढ़ाए जाने के बाद बड़े स्तर पर अधिकारियों की आवश्यकता पैदा हुई थी। राजधानी में पहले 22 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय थे, जिन्हें बढ़ाकर 39 करने का निर्णय लिया गया। व्यवस्था के तहत प्रत्येक सब-डिवीजन के हिसाब से एक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई, जिससे लोगों को संपत्ति पंजीकरण और इससे संबंधित सेवाओं के लिए अधिक सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।

सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की संख्या 22 से बढ़ाकर 39 किए जाने के बाद अतिरिक्त 17 पदों पर अधिकारियों की तैनाती की आवश्यकता थी। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अधिकारियों की सूची तैयार कर बड़े स्तर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की गई। कुल 46 अधिकारियों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिनमें 39 को सब-रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी दी गई और सात अधिकारियों को नई पोस्टिंग मिलने तक सर्विसेज विभाग में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया।

इसी व्यापक फेरबदल के दौरान मृत अधिकारी राकेश कुमार का नाम भी सूची में शामिल हो जाने का मामला सामने आया। उन्हें शिक्षा विभाग से स्थानांतरित दिखाते हुए नजफगढ़ में सब-रजिस्ट्रार नियुक्त कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड के समय पर अपडेट होने तथा ट्रांसफर आदेश जारी करने से पहले किए जाने वाले सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार इस संबंध में सर्विसेज ब्रांच के डिप्टी सेक्रेटरी जितेन्द्र कुमार अरोड़ा से प्रतिक्रिया लेने के लिए फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। ऐसे में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस अधिकारी का निधन हो चुका था, उसका नाम ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए तैयार सक्रिय अधिकारियों की सूची तक कैसे पहुंचा और कई स्तर की प्रशासनिक प्रक्रिया के बावजूद यह गलती पकड़ में क्यों नहीं आई। अब इस मामले में विभागीय जांच या रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की जाती है।

 

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