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BSP Politics: मायावती का बड़ा फैसला, आनंद कुमार के बेटों आकाश-ईशान को पार्टी में नहीं मिलेगा पद; दीपिका को भविष्य में मिल सकती है जिम्मेदारी

BSP Politics: मायावती का बड़ा फैसला, आनंद कुमार के बेटों आकाश-ईशान को पार्टी में नहीं मिलेगा पद; दीपिका को भविष्य में मिल सकती है जिम्मेदारी

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पार्टी में परिवारवाद को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए बड़ा फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को BSP में किसी छोटे या बड़े पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा। हालांकि आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद को लेकर मायावती ने अलग रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर दीपिका को पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है।

मायावती ने शनिवार को पार्टी की भविष्य की राजनीति, युवा नेतृत्व और परिवारवाद को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि BSP में किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसके परिवार के अन्य सदस्यों को भी राजनीतिक पद या लाभ मिलना चाहिए।

मायावती ने कहा कि उनका पूरा ध्यान बहुजन समाज के हित, कल्याण और उसे अपने पैरों पर खड़ा करने पर केंद्रित है। पार्टी और आंदोलन को मजबूत करना उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए संगठन में योग्य तथा समर्पित लोगों को आगे बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने BSP संस्थापक कांशीराम का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने अपने परिवार को राजनीतिक लाभ से दूर रखा, उसी विचारधारा पर वह भी काम करती रही हैं। मायावती के मुताबिक उन्होंने अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के सदस्यों को सांसद, विधायक, मंत्री या दूसरे राजनीतिक लाभ वाले पद दिलाने से परहेज किया है।

मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के कारण व्यक्तिगत देखभाल और सुरक्षा के लिए उन्हें अपने भाई-बहनों में से किसी एक को अपने साथ रखने की आवश्यकता महसूस हुई थी।

इसी कारण उनके छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से उनके साथ हैं। मायावती के मुताबिक आनंद कुमार उनकी देखभाल करने के साथ उनकी निगरानी में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालते रहे हैं।

लेकिन अब आनंद कुमार के परिवार के अन्य सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ दिए जाने को मायावती ने पार्टी और आंदोलन के हित में उचित नहीं माना है।

इसी आधार पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश और ईशान को BSP में किसी छोटे या बड़े पद पर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा।

मायावती ने केवल आकाश और ईशान तक ही अपना फैसला सीमित नहीं रखा। उन्होंने यह भी साफ किया कि भविष्य में उनके बच्चों को भी पार्टी की प्रमुख जिम्मेदारी सौंपने की योजना नहीं है।

इस फैसले के बीच आनंद कुमार की बेटी कुमारी दीपिका आनंद को लेकर मायावती ने अलग संभावना खुली रखी है। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

मायावती के मुताबिक भविष्य में यदि आनंद कुमार को पार्टी के कामकाज में दीपिका की मदद की जरूरत पड़ती है तो वह उनका सहयोग कर सकती हैं।

उन्होंने दीपिका की ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि आगे चलकर आवश्यकता के अनुसार उन्हें BSP में जिम्मेदारी दी जा सकती है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मायावती ने अभी दीपिका को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। फिलहाल उन्होंने केवल भविष्य में पार्टी की जरूरत के मुताबिक जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई है।

मायावती ने यह विकल्प भी खुला रखा है कि यदि भविष्य में दीपिका पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं होती हैं तो BSP किसी दूसरे समर्पित कार्यकर्ता को आगे ला सकती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी की आम सहमति से दलित समाज के किसी मिशनरी और समर्पित कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

इस बयान के जरिए मायावती ने संकेत दिया है कि BSP के भविष्य के नेतृत्व का सवाल केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन के भीतर काम करने वाले अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी भविष्य में शीर्ष जिम्मेदारी तक पहुंचने का रास्ता खुला रहेगा।

मायावती ने कांशीराम की राजनीतिक विचारधारा का उल्लेख करते हुए परिवारवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवारवाद के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे और उनकी शिष्या होने के नाते वह भी उसी रास्ते पर चल रही हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के हित से जुड़े फैसलों में किसी प्रकार का पारिवारिक मोह या दबाव प्रभावी नहीं होगा। BSP और बहुजन आंदोलन के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।

मायावती ने पार्टी संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की नीति का भी जिक्र किया। BSP की ओर से विशेष रूप से नई पीढ़ी और Gen-Z को संगठन में अधिक अवसर देने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में भी युवाओं को संगठन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी की रणनीति संगठन में नई पीढ़ी की भागीदारी बढ़ाने की है।

मायावती का कहना है कि BSP को भविष्य के लिए मजबूत करने के लिए संगठन में ज्यादा से ज्यादा योग्य और समर्पित लोगों को अवसर देना जरूरी है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पार्टी संगठन या भविष्य में सरकार बनने की स्थिति में किसी एक व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी राजनीतिक लाभ दिया जाएगा।

मायावती के मुताबिक BSP का उद्देश्य पार्टी को परिवारवाद से दूर रखते हुए सर्वसमाज के अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ना है।

इस दौरान मायावती ने BSP से निष्कासित किए गए नेताओं को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति साफ की। उन्होंने उन खबरों को खारिज किया जिनमें अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर किए गए नेताओं की वापसी की संभावना जताई जा रही थी।

मायावती ने ऐसी खबरों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी विरोधी गतिविधियों या अनुशासनहीनता के कारण निकाले गए लोगों को वापस लेने की कोई योजना नहीं है।

मायावती के इस बयान के बाद BSP के भविष्य के नेतृत्व को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है। खास तौर पर आकाश और ईशान को पार्टी पद से दूर रखने तथा दीपिका आनंद के लिए भविष्य की संभावना खुली रखने को महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि दीपिका आनंद को मायावती का उत्तराधिकारी कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि मायावती ने उन्हें तत्काल कोई बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी देने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने केवल भविष्य की परिस्थितियों और पार्टी की जरूरत के आधार पर जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई है।

मायावती ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि दीपिका भविष्य में ऐसी भूमिका के लिए तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी की आम सहमति से किसी दूसरे मिशनरी और समर्पित दलित कार्यकर्ता को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ऐसे में BSP के भविष्य के नेतृत्व को लेकर फिलहाल कई विकल्प खुले हुए हैं। लेकिन मायावती के ताजा फैसले से इतना स्पष्ट हो गया है कि आनंद कुमार के बेटों आकाश और ईशान के लिए पार्टी में पद पाने का रास्ता बंद कर दिया गया है, जबकि कुमारी दीपिका आनंद के लिए भविष्य में संगठनात्मक जिम्मेदारी की संभावना बरकरार रखी गई है।

 

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