
शाहदरा जिले से सामने आए ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में पेटीएम कर्मचारी बनकर छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को निशाना बनाने वाले कथित गिरोह के पांच सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर पेटीएम खाते की केवाईसी में गड़बड़ी और क्यूआर कोड साउंडबॉक्स अपडेट करने का झांसा देकर दुकानदारों के मोबाइल फोन तक पहुंच बनाने और फिर उनके बैंक अकाउंट से रकम निकालने का आरोप है। पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए 95 हजार रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला सुलझाने का दावा किया है। जांच में इस गिरोह द्वारा इसी तरीके से करीब 50 से 60 अन्य लोगों को भी निशाना बनाए जाने की आशंका सामने आई है।
पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, यह मामला शाहदरा साइबर थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 55/26 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रामअवतार सब्जी बेचने का काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि 20 अक्टूबर को दो युवक उनके पास पहुंचे और खुद को पेटीएम कंपनी का कर्मचारी बताया। दोनों ने उनसे कहा कि उनके पेटीएम खाते की केवाईसी में समस्या है और क्यूआर कोड साउंडबॉक्स को भी अपडेट करने की जरूरत है। यह आरोप लगाया गया है कि इसी बहाने दोनों युवकों ने उनका भरोसा जीता और कुछ समय के उद्देश्य से उनका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया।
शिकायत में बताए गए घटनाक्रम के अनुसार, युवकों के जाने के बाद रामअवतार के बैंक खाते से दो अनधिकृत लेनदेन हुए। पहले खाते से 50 हजार रुपये और फिर 45 हजार रुपये निकाले गए। इस तरह उनके खाते से कुल 95 हजार रुपये की रकम निकाल ली गई। जब उन्हें खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली तो उन्होंने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा साइबर पुलिस ने जांच शुरू की और लेनदेन से जुड़े तकनीकी तथा बैंकिंग रिकॉर्ड की पड़ताल की।
मामले की पड़ताल में पुलिस को संदेह हुआ कि आरोपी छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को पेटीएम कर्मचारी बनकर निशाना बनाते थे। वे केवाईसी अपडेट, खाते में तकनीकी समस्या या क्यूआर कोड साउंडबॉक्स में खराबी जैसी बातें कहकर दुकानदारों का भरोसा जीतते थे। इसके पश्चात मोबाइल फोन अपने पास लेकर कथित तौर पर बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी जानकारियों का दुरुपयोग करते थे। पुलिस को यह भी संभावना जताई जा रही है कि इसी तरीके से गिरोह ने कई अन्य लोगों के साथ ठगी की है।
इस प्रकरण में पुलिस ने जुनैद (23), अनस (19), मोहित (24), रोहित (19) और सुमित कुमार (19) को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जुनैद पहले पेटीएम से जुड़ा हुआ था और उसके मोबाइल फोन से कंपनी का पहचान पत्र भी मिला है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह इस गिरोह में मुख्य समन्वयक की भूमिका निभा रहा था। अब पुलिस इस सवाल की पड़ताल कर रही है कि आरोपियों ने कंपनी से जुड़े अपने पुराने अनुभव और पहचान का इस्तेमाल किस तरह दुकानदारों को विश्वास में लेने के उद्देश्य से किया।
जांच में आरोपियों से जुड़े बैंक अकाउंट का संबंध देशभर में दर्ज करीब 20 साइबर अपराध शिकायतों और मामलों से भी सामने आया है। पुलिस को संभावना जताई जा रही है कि ठगी से हासिल रकम को पहले अलग-अलग बैंक अकाउंट में भेजा जाता था और इसके पश्चात एटीएम के जरिए नकद राशि निकाली जाती थी। इस तरीके का इस्तेमाल कथित तौर पर रकम के वास्तविक स्रोत और लेनदेन की कड़ी छिपाने के उद्देश्य से किया जाता था। अब पुलिस जुड़े हुए बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबरों और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
आरोपियों के पास से पुलिस ने छह मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड, चार एटीएम कार्ड और नकद राशि निकासी से जुड़ी तीन पर्चियां जब्त की हैं। पुलिस इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। मोबाइल फोन और सिम कार्ड से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस बात का पता लगाने की प्रयास जारी है कि आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया था और ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
यह कार्रवाई इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा की देखरेख में गठित पुलिस टीम ने की। पुलिस के ब्योरे के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने के साथ-साथ आरोपियों के आर्थिक लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। करीब 50 से 60 अन्य लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाए जाने की आशंका के चलते पुलिस जुड़े हुए शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
पुलिस ने दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और आम नागरिकों से अपील की है कि पेटीएम या किसी अन्य डिजिटल भुगतान कंपनी का कर्मचारी बताकर आने वाले अनजान लोगों पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी न सौंपें। केवाईसी अपडेट, क्यूआर कोड साउंडबॉक्स बदलने या तकनीकी समस्या दूर करने के नाम पर किए जाने वाले दावों की पुष्टि कंपनी के सरकारी माध्यम से ही करें। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो उसे बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।






