
उत्तर प्रदेश के रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ा शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान शनिवार शाम रामपुर जेल से बाहर आए, लेकिन उनकी रिहाई ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जेल के गेट से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें गिरफ्त में ले लिया। ED की टीम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों के साथ रामपुर जेल के बाहर पहुंची थी। एजेंसी की कार्रवाई के बाद आजम खान को अपने साथ ले जाया गया। ED अब उन्हें रविवार सुबह करीब 10 बजे न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रही है, जहां उनकी कस्टडी की मांग की जाएगी।
आजम खान की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब कुछ ही घंटे पहले उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सजा को निलंबित करने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद रामपुर जेल से उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। दोनों की रिहाई को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थकों और परिवार के लोगों में उम्मीद जगी थी, लेकिन आजम खान के मामले में ED की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को बदल दिया।
जानकारी के मुताबिक, ED ने आजम खान के खिलाफ 14 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया था। इसी मामले में एजेंसी उनकी गिरफ्तारी के उद्देश्य से शनिवार को रामपुर जेल पहुंची। टीम के साथ CRPF के जवान भी मौजूद थे। आजम खान जैसे ही जेल से बाहर आए, ED के अधिकारियों ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। इसके पश्चात उन्हें गिरफ्त में ले लिया गया। एजेंसी अब इस प्रकरण में अदालत के सामने अपना पक्ष रखकर आजम खान की कस्टडी मांगने वाली है। रविवार सुबह होने वाली पेशी के दौरान यह स्पष्ट होगा कि अदालत उनकी हिरासत को लेकर क्या आदेश देती है।
इससे पहले आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली थी। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की थी। याचिका में दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा को निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी। इस प्रकरण में 15 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो जाने के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए उनकी जमानत मंजूर कर ली और सजा को निलंबित करने का आदेश दिया।
हालांकि, हाईकोर्ट ने दोनों की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। इस तरह अदालत से जमानत और सजा के निलंबन की राहत मिलने के बावजूद दोषसिद्धि का फैसला बरकरार रहा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रामपुर जेल में उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आजम खान और अब्दुल्ला आजम को लेकर जेल के बाहर समर्थकों की निगाहें टिकी थीं। लेकिन आजम खान की रिहाई के तुरंत बाद ED की गिरफ्तारी ने उनके कानूनी मामलों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया।
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अब कहने के उद्देश्य से क्या बचा है और वह क्या कह सकते हैं। आजम खान ने आरोप लगाया कि कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुस्लिम होने की यही सजा है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने विश्वविद्यालय बनाया। आजम खान ने यह भी कहा कि उन्होंने बच्चों के उद्देश्य से स्कूल बनाए और सवाल किया कि क्या यही उनका अपराध है। उनके ये बयान जेल से रिहाई के बाद सामने आए, जिसके कुछ ही समय बाद ED ने उन्हें गिरफ्त में ले लिया।
आजम खान की गिरफ्तारी पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आजम खान के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने लिखा कि आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि जब वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ मुकदमों की साजिश की जा रही है और कहा कि इसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया देख रही है।
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि एक उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना गलत है। उन्होंने इसे कायराना हरकत बताते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है। सपा अध्यक्ष ने आगे लिखा कि जब हालात बदलेंगे तो आज जो लोग ऐसी कार्रवाई कर रहे हैं, उन्हें भी इसका सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना था कि जब नाइंसाफी हद से गुजर जाती है तो वह जुल्म करने वालों के उद्देश्य से ही मुसीबत बन जाती है। अखिलेश यादव ने पूरे घटनाक्रम को बेहद निंदनीय बताया।
आजम खान की गिरफ्तारी के बाद अब सबकी नजर रविवार सुबह होने वाली अदालत की पेशी पर है। ED की तरफ से कस्टडी की मांग किए जाने की बात सामने आई है। न्यायालय में एजेंसी के तर्क और आजम खान की तरफ से रखे जाने वाले पक्ष के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। दूसरी ओर, दो पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट से मिली राहत और ED की अलग कार्रवाई के कारण आजम खान के सामने कानूनी चुनौतियां बनी हुई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अदालत ED की मांग पर क्या फैसला सुनाती है और इस प्रकरण में आगे की जांच किस दिशा में बढ़ती है।






