
DMRC Apology: CJP प्रदर्शन के दौरान 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने पर दिल्ली मेट्रो ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किए जाने के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट के सामने बिना शर्त माफी पेश की है। 14 अक्टूबर को दाखिल हलफनामे में निगम की चेयरपर्सन डी. थारा ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो ट्रेनों का संचालन बंद नहीं किया गया था। हालांकि सुरक्षा कारणों से कुछ स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही सीमित की गई थी।
10 अक्टूबर को CJP और कुछ छात्र संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विरोध का आह्वान किया था। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने का मामला अदालत तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं पूरी तरह बाधित न होने देने पर जोर दिया था।
DMRC ने अदालत को बताया कि उसके 303 स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास पर पाबंदी लगाई गई थी, जबकि 258 स्टेशन सामान्य रूप से उपलब्ध रहे। निगम के अनुसार, पुलिस और कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के सुरक्षा आकलन के आधार पर प्रतिबंध लगाए गए थे। उसने यह भी कहा कि पूर्व आदेश के समय उसे अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला था, लेकिन अदालत के सम्मान में बिना शर्त माफी दी जा रही है।
हलफनामे के मुताबिक, उस दिन 271 मेट्रो ट्रेनों ने कुल 4,157 फेरे लगाए। DMRC का दावा है कि निर्धारित सेवाओं में कोई कटौती या ट्रिप रद्द नहीं हुई। प्रतिबंध वाले 45 स्टेशनों में से 14 पर इंटरचेंज की सुविधा बनी रही। इनमें राजीव चौक, कश्मीरी गेट, केंद्रीय सचिवालय, मंडी हाउस और हौज खास शामिल थे। निगम ने बताया कि रात 10 बजे तक संबंधित प्रतिबंध हटा लिए गए।
यात्री संख्या पर भी असर पड़ा। DMRC के अनुसार, 10 अक्टूबर को करीब 32 लाख लोगों ने सफर किया, जबकि सामान्य दूसरे शनिवार को लगभग 58 लाख यात्री होते हैं। निगम ने माना कि पाबंदियों से यात्रियों को असुविधा हुई, लेकिन उसका कहना है कि मेट्रो नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं किया गया था।
DMRC ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ अवमानना नोटिस समाप्त करने का अनुरोध किया है। माफी दाखिल होने के बावजूद इस मुद्दे पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।






