
Election Commission: ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी का हमला, मोदी-शाह सरकार पर भी लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है। गांधी जयंती के मौके पर युवाओं के प्रदर्शन के बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने कहा कि गांधी जयंती के दिन हजारों युवा कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक और बिना हिंसा के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपनी मांग उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और लोकतंत्र की रक्षा की जाए।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान युवाओं को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा है। राहुल गांधी इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध चुके हैं। सितंबर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ जांच की मांग भी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। एक अक्टूबर को भी उन्होंने SIR को लेकर मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप दोहराए और जांच की मांग की।
राहुल गांधी ने अपने पहले के बयानों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर ‘वोट चोरी’, ‘कानून चोरी’ और ‘संस्था चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। उन्होंने दावा किया था कि चुनाव में कथित गड़बड़ियों का असर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद से बनने वाले कानूनों की वैधता पर भी पड़ता है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि ड्राफ्ट स्तर पर अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के बीच टिप्पणियां, सुझाव और नोट देना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार SIR से जुड़े अंतिम फैसले तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया है और उनके बयानों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR के मुद्दे पर विरोध जारी है। INDIA ब्लॉक ने भी इस मुद्दे पर संयुक्त प्रदर्शन और ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च की घोषणा की है।
दिल्ली में दो अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात तथा मेट्रो सेवाओं को लेकर प्रतिबंध लगाए गए।
फिलहाल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राहुल गांधी अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोपों को खारिज किया है। मामले में आगे की राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।






