क्राइमराजनीति

Rahul Gandhi Complaint: महिला पत्रकार ऋचा पराशर ने राहुल गांधी के खिलाफ दी आपराधिक शिकायत, FIR दर्ज करने की मांग

Rahul Gandhi Complaint: महिला पत्रकार ऋचा पराशर ने राहुल गांधी के खिलाफ दी आपराधिक शिकायत, FIR दर्ज करने की मांग

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़े कथित बदसलूकी के प्रकरण में नया घटनाक्रम पता चला है। महिला पत्रकार ऋचा पराशर ने 17 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और अन्य लोगों के विरुद्ध आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। पत्रकार ने नई दिल्ली जिले के डीसीपी को शिकायत देकर प्रकरण में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। यह शिकायत 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के समय हुई कथित घटना से संबंधित है। ऋचा पराशर का आरोप है कि रिपोर्टिंग करते समय उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें धमकी दी गई और उनके विरुद्ध आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर विरोध जताने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इसी दौरान वहां रिपोर्टिंग कर रहीं पत्रकार ऋचा पराशर ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींचा। उनके अनुसार, इसके बाद राहुल गांधी के साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह भीड़ के बीच सीढ़ियों पर गिर गईं। पत्रकार ने यह भी दावा किया कि इस घटनाक्रमक्रम में उनका मोबाइल फोन क्षतिग्रस्त हो गया और उन्हें चोटें आईं।

ऋचा पराशर ने घटना के बाद बताया था कि वह करीब तीन महीने की गर्भवती हैं। उनके अनुसार, गिरने और पेट में दर्द होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय वहां काफी भीड़ थी और धक्का-मुक्की के कारण उन्हें परेशानी हुई। इस मामले को लेकर सामने आए वीडियो और पत्रकार के बयान के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया था। हालांकि, घटना के विभिन्न पहलुओं और संबंधित लोगों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

अब पत्रकार ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में धारा 74, धारा 115(2), धारा 131, धारा 125 और धारा 3(5) का उल्लेख किया गया है। ये धाराएं महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से आपराधिक बल के इस्तेमाल, जानबूझकर चोट पहुंचाने, हमला या आपराधिक बल के प्रयोग, मानव जीवन अथवा व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्य और साझा इरादे से किए गए अपराधों से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता चाहती हैं कि पुलिस प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर आरोपों की जांच करे और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।

इस मामले पर कांग्रेस की ओर से पहले आरोपों को खारिज किया गया था। पार्टी की तरफ से इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप बताया गया था। ऐसे में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध वीडियो, मेडिकल दस्तावेजों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच से घटना की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में सहायता मिल सकती है। वर्तमान में शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने या पड़ताल में आगे की कार्रवाई के बारे में अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इस घटनाक्रमक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों से संबंधित याचिका पर सुनवाई का मुद्दा सामने आया था। अदालत ने मामले को सुनवाई के उद्देश्य से सूचीबद्ध करने की बात कही थी। अब दिल्ली पुलिस के समक्ष दी गई आपराधिक शिकायत ने मामले को एक नया कानूनी आयाम दे दिया है। आगे यह देखना होगा कि पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और पड़ताल में क्या तथ्य सामने आते हैं। वर्तमान में राहुल गांधी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता; मामले का निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

 

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