
Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, दो हफ्ते में 2 करोड़ जमा करने का निर्देश
नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल अंतरिम राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें दो सप्ताह का समय देते हुए बकाया भुगतान को लेकर ठोस प्रस्ताव पेश करने और अपनी गंभीरता दिखाने के लिए 2 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है। इसके साथ ही राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा कराने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भुगतान को लेकर उन्हें यह अंतिम अवसर दिया जा रहा है। फिलहाल उन्हें सरेंडर करने से मिली अंतरिम छूट अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।
यह मामला फिल्म निर्माण के लिए लिए गए कर्ज और उससे जुड़े चेक बाउंस होने से संबंधित है। राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए 2010 में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। बाद में रकम लौटाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, लेकिन भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और वर्षों तक अलग-अलग स्तर पर कानूनी कार्यवाही चलती रही।
चेक बाउंस के सात मामलों में राजपाल यादव को अप्रैल 2018 में दोषी ठहराया गया था। बाद में सेशन कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा। मामला आगे दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां समय-समय पर अभिनेता को बकाया राशि के भुगतान के लिए अवसर दिए गए। भुगतान से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं होने के बाद 2026 में उन्हें सरेंडर भी करना पड़ा और वह कुछ समय जेल में रहे। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने बताया कि अभिनेता करीब साढ़े चार महीने जेल में रह चुके हैं और आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद भी मिली है।
इससे पहले 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को राहत देते हुए भुगतान से जुड़ी शर्त रखी थी। अदालत ने कहा था कि सरेंडर से छूट पाने के लिए उन्हें कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। इसके बाद मामला दोबारा सुनवाई के लिए आया और राजपाल यादव की ओर से अतिरिक्त समय मांगा गया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि अभिनेता भुगतान की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं और अपनी गंभीरता दिखाने के लिए 2 करोड़ रुपये जमा करने को तैयार हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले के लंबे समय से लंबित रहने और पूर्व में दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी भी जताई। अदालत ने साफ किया कि अब राजपाल यादव को अंतिम अवसर दिया जा रहा है। उन्हें अगले दो सप्ताह में 2 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर कोर्ट के सामने भुगतान को लेकर ठोस प्रस्ताव रखना होगा। इस अवधि में अदालत ने उन्हें तत्काल सरेंडर करने से राहत दी है, लेकिन यह राहत निर्धारित शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को अपना पासपोर्ट भी जमा कराने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी इस मामले में अदालतों की ओर से उनके विदेश जाने पर प्रतिबंध से संबंधित शर्तें लगाई जा चुकी हैं। पासपोर्ट जमा कराने का उद्देश्य कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अब अभिनेता को अदालत द्वारा तय समय के भीतर भुगतान संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।
इस वित्तीय विवाद की शुरुआत करीब 16 साल पहले हुई थी। फिल्म निर्माण के लिए लिया गया कर्ज समय पर वापस नहीं होने और भुगतान के लिए दिए गए चेक के बाउंस होने के बाद शिकायतकर्ता कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद अलग-अलग अदालतों में मामले की सुनवाई होती रही। बीच में दोनों पक्षों के बीच समझौते और भुगतान के प्रयास भी हुए, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो सका।
राजपाल यादव की ओर से लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि बकाया रकम का भुगतान कर मामले को सुलझाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें फिलहाल ऐसा करने का एक और मौका दिया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार दिए गए आश्वासन और समय-सीमा का पालन करना जरूरी होगा। निर्धारित अवधि में रकम जमा नहीं होने या संतोषजनक भुगतान योजना सामने नहीं आने पर अभिनेता की मुश्किलें दोबारा बढ़ सकती हैं।
मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। तब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि राजपाल यादव ने अदालत के निर्देशों के मुताबिक रकम जमा की है या नहीं और बाकी बकाया राशि चुकाने के लिए उनकी ओर से क्या ठोस योजना पेश की गई है। तब तक उन्हें सरेंडर करने से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राजपाल यादव को तत्काल जेल जाने से राहत मिल गई है, लेकिन यह राहत शर्तों के साथ है। अगले दो सप्ताह उनके लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि उन्हें भुगतान की दिशा में ठोस कदम उठाकर अदालत के सामने अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। अब 5 अक्टूबर की सुनवाई में यह तय होगा कि मामले में उन्हें आगे राहत मिलती है या अदालत कोई अन्य आदेश जारी करती है।






