
Form 6 Controversy: राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, चुनाव आयोग ने बयान को बताया ‘भ्रामक’
वोटर रजिस्ट्रेशन के फॉर्म-6 को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच विवाद सामने आया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया। राहुल गांधी ने इसे अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पद के दुरुपयोग से जोड़ते हुए सवाल उठाए। इसके कुछ ही समय बाद चुनाव आयोग ने उनके बयान का फैक्ट चेक करते हुए उसे ‘भ्रामक’ बताया।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में चुनाव आयोग की 26 सितंबर 2026 की प्रेस नोट का एक हिस्सा साझा किया था। उन्होंने दावा किया कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए। राहुल गांधी के मुताबिक, यह कथित बदलाव बीजेपी को मदद पहुंचाने के लिए पद के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जवाब दिया। आयोग ने कहा कि उनका बयान भ्रामक है। ECI के मुताबिक, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR शुरू करने का आदेश 24 जून 2025 को आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में इस आदेश को बरकरार रखा था।
चुनाव आयोग ने अपने जवाब में 26 सितंबर 2026 की प्रेस नोट संख्या 120 के बिंदु 1(iii) का भी हवाला दिया। आयोग के अनुसार, उसमें कहा गया था कि SIR के लिए फॉर्म-6 के साथ जो घोषणा-पत्र जोड़ा गया था, उसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। आयोग ने इसी आधार पर राहुल गांधी के इस दावे को भ्रामक बताया कि फॉर्म-6 में बदलाव किसी एक अधिकारी द्वारा एकतरफा तरीके से किया गया था।
हालांकि, इसी मुद्दे पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई और अदालत ने फॉर्म-6 के कथित संशोधित संस्करण को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की बात कही। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने कहा कि जब संबंधित रिकॉर्ड उसके सामने पेश किया जाएगा, तब यह देखा जाएगा कि फॉर्म-6 में किसने और क्या बदलाव किया।
विवाद मुख्य रूप से फॉर्म-6 में जोड़े गए एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा में आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि क्या उसका, उसके माता-पिता या कुछ मामलों में पूर्वजों का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज था। इस अतिरिक्त घोषणा को लेकर ही कानूनी और राजनीतिक सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं और आरोप लगाया गया है कि ऐसा करने के लिए संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया। अदालत ने इस मामले में केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। हालांकि, सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया।
इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। राहुल गांधी और याचिकाकर्ताओं की ओर से फॉर्म-6 में कथित बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और उससे जुड़ा प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बरकरार है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड की जांच के जरिए यह स्पष्ट करना चाहता है कि फॉर्म-6 के कथित संशोधन का वास्तविक स्वरूप और स्रोत क्या था।
मामला अभी न्यायिक विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में रिकॉर्ड सामने आने के बाद फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलाव को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल चुनाव आयोग का कहना है कि राहुल गांधी का दावा भ्रामक है, जबकि राहुल गांधी ने अपने आरोपों को दोहराते हुए इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।






