
Stray Dogs: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, MCD-NDMC कर्मचारियों को लखनऊ नगर निगम देगा 15 दिन की ट्रेनिंग
दिल्ली में आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) को लखनऊ नगर निगम के साथ समन्वय कर पशु चिकित्सकों, पैरावेटरिनरी कर्मचारियों और आवारा कुत्तों को पकड़ने वाले कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह प्रशिक्षण जल्द से जल्द आयोजित किया जाए और इसके लिए लखनऊ नगर निगम की मदद ली जाए।
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की खंडपीठ के सामने सुनवाई के दौरान न्याय मित्र गौरी मौलेखी ने बताया कि लखनऊ नगर निगम दिल्ली में अपने प्रशिक्षित व्यक्ति को भेजकर करीब 15 दिन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने पर सहमत हुआ है। यह ट्रेनिंग भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार कराई जाएगी। कोर्ट ने MCD और NDMC को लखनऊ नगर निगम के साथ तालमेल कर इस कैंप को जल्द आयोजित करने का निर्देश दिया।
यह मामला दिल्ली में आवारा कुत्तों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की निगरानी से जुड़ी स्वत: संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। हाईकोर्ट राजधानी में स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने से जुड़े निर्देशों के पालन की निगरानी कर रहा है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली के नगर निकायों की ओर से अदालत को बताया गया कि MCD के आनंद विहार क्षेत्र और NDMC के दो इलाकों में पहले ही प्रशिक्षण एवं नसबंदी से जुड़े कैंप आयोजित किए जा चुके हैं। निकायों ने इन कैंपों के परिणाम संतोषजनक होने की जानकारी अदालत को दी। इसके बाद हाईकोर्ट ने नसबंदी की प्रक्रिया को और तेज करने के लिए दोनों निकायों के दो-दो अतिरिक्त वार्डों में भी कैंप आयोजित करने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा।
अदालत ने MCD और NDMC को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश भी दिया कि उनके संबंधित क्षेत्रों के किन वार्डों में आवारा कुत्तों का पूरी तरह नसबंदीकरण किया जा चुका है। कोर्ट नसबंदी की गति और उसके वास्तविक परिणामों की निगरानी कर रहा है, ताकि निर्धारित प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
न्याय मित्र गौरी मौलेखी ने अदालत के सामने आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए प्रस्तावित पायलट कैंप को लागू करने का रोडमैप भी रखा। कोर्ट ने MCD के अधिवक्ता मनु चतुर्वेदी को इस रोडमैप पर सुझाव देने के लिए कहा है। इसके साथ ही MCD को एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अदालत के समक्ष मंजूरी के लिए रखने का निर्देश दिया गया है।
इस पूरी कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी है। हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक, पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ-साथ पैरावेटरिनरी स्टाफ और डॉग कैचर कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना और आवारा कुत्तों को पकड़ने के दौरान निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस व्यापक निर्देशों की निगरानी से जुड़ी है, जिसके तहत सार्वजनिक संस्थानों और संवेदनशील स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट को दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित हाईकोर्ट को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अनुपालन की निगरानी और आवश्यक कदम उठाने की अनुमति दी थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की है। तब तक MCD और NDMC को प्रशिक्षण, नसबंदी कैंप और संबंधित कार्ययोजना को लेकर आगे की कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट की निगरानी में अब यह देखा जाएगा कि दोनों नगर निकाय प्रशिक्षण और नसबंदी की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं और कितने वार्डों में निर्धारित लक्ष्य हासिल किया जाता है।






