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CBI Action: प्रशांत विहार थाने के SI लेखराज को 80 हजार की रिश्वत लेते CBI ने रंगे हाथ पकड़ा

CBI Action: प्रशांत विहार थाने के SI लेखराज को 80 हजार की रिश्वत लेते CBI ने रंगे हाथ पकड़ा

दिल्ली के प्रशांत विहार थाना क्षेत्र में तैनात दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर लेखराज को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। CBI के मुताबिक, आरोपी सब-इंस्पेक्टर ने एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में कार्रवाई करने और उसे मदद पहुंचाने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। जांच एजेंसी ने जाल बिछाकर उसे 80 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।

CBI के अनुसार, प्रशांत विहार थाने में शिकायतकर्ता के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज था और सब-इंस्पेक्टर लेखराज उस मामले के जांच अधिकारी थे। आरोप है कि इसी मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में कार्रवाई करने और उसे राहत पहुंचाने के बदले लेखराज ने उससे एक लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की प्राथमिक पुष्टि की और 4 अक्टूबर 2026 को केस दर्ज किया।

जांच एजेंसी का दावा है कि रिश्वत की रकम में से 20 हजार रुपये पहले ही लिए जा चुके थे। CBI के मुताबिक, आरोपी सब-इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ता की व्यक्तिगत तलाशी के दौरान उसकी जेब से 20 हजार रुपये बरामद किए और कथित तौर पर दबाव बनाकर यह रकम अपने पास रख ली। इसके बाद उसने शिकायतकर्ता को बाकी 80 हजार रुपये अगले दिन लाने के लिए कहा।

इसके बाद शिकायतकर्ता की सूचना के आधार पर CBI ने ट्रैप की कार्रवाई की। एजेंसी के मुताबिक, 4 अक्टूबर को जाल बिछाया गया और सब-इंस्पेक्टर लेखराज को शिकायतकर्ता से 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए पकड़ लिया गया। कार्रवाई के बाद CBI ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी।

CBI की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कथित रिश्वत उस आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता को फायदा पहुंचाने के लिए मांगी गई थी, जिसकी जांच लेखराज कर रहे थे। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की मांग और रकम के लेनदेन से जुड़े और कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं तथा इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।

मामले में CBI ने आरोपी सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच एजेंसी पहले लिए गए 20 हजार रुपये, बाद में मांगी गई 80 हजार रुपये की रकम और पूरे प्रकरण में आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।

 

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