
NDMC Transfer Row: एनडीएमसी के पर्सनल डिपार्टमेंट में तबादलों पर उठे गंभीर सवाल, संवेदनशील विभागों में पोस्टिंग को लेकर चर्चा
नई दिल्ली। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी के पर्सनल डिपार्टमेंट में हाल ही में जारी तबादला आदेश को लेकर प्रशासनिक पारदर्शिता और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। 29 सितंबर को जारी आदेश में इस साल किए गए तबादलों की समीक्षा और पुनरीक्षण के लिए तीन निदेशकों की एक समिति गठित किए जाने की बात सामने आई है। समिति के गठन के बाद यह सवाल उठ रहा है कि तबादलों की प्रक्रिया की समीक्षा की जरूरत किन परिस्थितियों में महसूस हुई और इसके पीछे प्रशासनिक स्तर पर क्या कारण रहे।
एनडीएमसी में एस्टेट, टैक्स, इंफोर्समेंट और कमर्शियल जैसे विभागों को संवेदनशील माना जाता है। इन विभागों का संबंध संपत्ति प्रबंधन, कर निर्धारण, अतिक्रमण हटाने, लाइसेंस, व्यावसायिक गतिविधियों और राजस्व से जुड़े मामलों से होता है। ऐसे में इन विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी कर्मचारी की पोस्टिंग को लेकर पक्षपात, सिफारिश या आर्थिक प्रभाव के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आई है कि एनडीएमसी के कुछ संवेदनशील विभागों में कुछ कर्मचारियों की लंबे समय तक तैनाती और बार-बार महत्वपूर्ण पदों पर बने रहने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ लोग इन पदों को कथित तौर पर ‘कमाऊ पोस्टिंग’ के तौर पर देखते हैं। हालांकि, किसी कर्मचारी या अधिकारी पर भ्रष्टाचार अथवा आर्थिक अनियमितता का आरोप केवल चर्चा के आधार पर सही नहीं माना जा सकता। ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए दस्तावेजी जांच और संबंधित रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल एनडीएमसी के पर्सनल डिपार्टमेंट की तबादला प्रक्रिया को लेकर है। प्रशासनिक जरूरत, कार्यक्षमता और निष्पक्ष रोटेशन को तबादलों का आधार माना जाता है। ऐसे में यह जांच का विषय हो सकता है कि संवेदनशील पदों पर तैनाती के लिए निर्धारित नियमों और विभागीय प्रक्रिया का किस हद तक पालन किया गया। साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संवेदनशील पद पर तैनाती कितने समय तक रही और तबादले के बाद उसे किस विभाग या पद पर भेजा गया।
तबादला व्यवस्था का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को एक सीट से दूसरी सीट पर भेजना नहीं होना चाहिए। यदि किसी कर्मचारी को एक संवेदनशील विभाग से हटाकर दूसरे समान रूप से संवेदनशील विभाग में तैनात किया जाता है तो रोटेशन की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठ सकता है। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संवेदनशील पदों पर तैनाती की अधिकतम अवधि क्या है और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अनिवार्य रोटेशन की व्यवस्था किस प्रकार लागू की जाती है।
एनडीएमसी की जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिषद के अधिकार क्षेत्र में राजधानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आता है और इसके कई विभाग सीधे सार्वजनिक राजस्व तथा संपत्ति से जुड़े मामलों को देखते हैं। संपत्ति कर, व्यावसायिक लाइसेंस, अतिक्रमण, निर्माण संबंधी कार्रवाई और संपत्ति प्रबंधन जैसे मामलों में प्रशासनिक फैसलों का आम लोगों और कारोबारियों पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए इन विभागों में नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया पर पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासनिक विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
यदि संवेदनशील विभागों में भ्रष्टाचार, पक्षपात या मिलीभगत से संबंधित कोई शिकायत सामने आती है तो केवल तबादला कर देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे मामलों में संबंधित फाइलों, आदेशों, लाइसेंस, संपत्ति मामलों, कर निर्धारण और प्रवर्तन कार्रवाई के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शिकायतों में कोई तथ्यात्मक आधार है या नहीं और कहीं नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है या नहीं।
29 सितंबर के आदेश के आधार पर गठित तीन निदेशकों की समिति से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वह तबादलों की प्रक्रिया और उसके आधार की विस्तृत समीक्षा करे। समिति किन अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला कब, किस पद से और किस आधार पर किया गया, इसकी जांच कर सकती है। इसके साथ ही संवेदनशील पदों पर तैनाती की अवधि, विभागीय रोटेशन, प्राप्त शिकायतों और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड को भी समीक्षा के दायरे में रखा जा सकता है।
यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ नियमों की अनदेखी, पक्षपात या अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना भी प्रशासनिक पारदर्शिता का हिस्सा होगा। फिलहाल तबादलों को लेकर उठ रहे सवालों का अंतिम जवाब समिति की समीक्षा और एनडीएमसी प्रशासन के आधिकारिक रुख से ही स्पष्ट होगा।






