
Firozabad Murder Case: डेढ़ वर्षीय आरव हत्याकांड में दोषी जितेंद्र पाठक को फांसी, 40 दिन में आया ऐतिहासिक फैसला
फिरोजाबाद, 10 जुलाई: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में चर्चित डेढ़ वर्षीय मासूम आरव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है। महज 40 दिनों के भीतर इस जघन्य मामले की सुनवाई पूरी कर अदालत ने सजा का ऐलान किया। यह फैसला जिले के सबसे तेजी से निस्तारित हुए चर्चित मामलों में शामिल माना जा रहा है।
यह मामला 30 मई को शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में हुई उस दिल दहला देने वाली घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। गुरुवार को अदालत ने जितेंद्र पाठक को हत्या का दोषी करार दिया था, जबकि शुक्रवार को सजा पर सुनवाई के बाद जिला जज ने उसे मृत्युदंड देने का आदेश सुनाया।
इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच पुलिस ने बेहद तेजी से पूरी की। घटना के मात्र छह दिन के भीतर विवेचना पूरी कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी गई थी। इसके बाद अदालत ने मामले को प्राथमिकता देते हुए लगातार सुनवाई की। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 13 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया।
अदालत ने सभी गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अन्य सबूतों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद जितेंद्र पाठक को दोषी माना और मामले को दुर्लभतम श्रेणी का मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।
फैसले के मद्देनजर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोषी को अदालत में पेश किया गया। सजा सुनाए जाने के बाद जितेंद्र पाठक भावुक हो गया और अदालत कक्ष में स्वयं को थप्पड़ मारने लगा। हालांकि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि पुलिस ने समयबद्ध जांच कर मजबूत साक्ष्य एकत्र किए और अदालत में प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों और सबूतों को न्यायालय ने विश्वसनीय माना, जिसके आधार पर दोषी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
जांच के दौरान सामने आया कि आरव की मां रति देवी की शादी वर्ष 2024 में बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी। वैवाहिक विवाद के चलते वह पिछले कई महीनों से अपने मायके में रह रही थीं। इसी दौरान सुमित का रिश्तेदार विराज उर्फ जितेंद्र पाठक रति के संपर्क में आया और उसने शादी का प्रस्ताव रखा। रति द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद वह उससे रंजिश रखने लगा।
30 मई को जब रति अपनी मां के साथ एक कानूनी सलाह के लिए शिकोहाबाद पहुंची थीं, तभी आरोपी वहां पहुंच गया। उसने मासूम आरव को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले लिया। आरोप है कि सुनसान स्थान पर ले जाकर उसने बच्चे को सड़क पर कई बार पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी शव को घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया था।
इस निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई, समयबद्ध विवेचना और अदालत में तेज सुनवाई के कारण महज 40 दिनों के भीतर फैसला आने को त्वरित न्याय का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।






