
NDMC : छह देशों के वरिष्ठ सिविल सेवकों ने किया एनडीएमसी का दौरा, शहरी प्रशासन और सुशासन मॉडल का लिया अनुभव
नई दिल्ली। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने एक बार फिर अपने उत्कृष्ट शहरी प्रशासन, स्वच्छता प्रबंधन और डिजिटल सुशासन मॉडल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। बुधवार को भूटान, श्रीलंका, ताजिकिस्तान, फिलिस्तीन, नाइजीरिया और नाइजर सहित छह देशों के 40 वरिष्ठ सिविल सेवकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एनडीएमसी मुख्यालय का दौरा किया। यह दौरा “नागरिक प्रशासन में उत्कृष्ट कार्यप्रणालियां” विषय पर आयोजित विशेष ज्ञान-साझाकरण एवं अनुभव-विनिमय कार्यक्रम के अंतर्गत संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को एनडीएमसी द्वारा अपनाए जा रहे आधुनिक शहरी प्रबंधन, नागरिक सेवाओं, स्वच्छता अभियानों और सतत विकास संबंधी पहलों की विस्तृत जानकारी दी गई। एनडीएमसी के सचिव राहुल सिंह ने प्रस्तुति के माध्यम से परिषद की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक नवाचारों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली को देश की सबसे स्वच्छ, हरित और नागरिक-अनुकूल राजधानियों में शामिल करने के लिए परिषद लगातार नवीन तकनीकों और प्रभावी योजनाओं को लागू कर रही है।
राहुल सिंह ने हाल ही में शुरू की गई “अनुपम कॉलोनी परियोजना” का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि इस पहल के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। साथ ही परिषद की वित्तीय मजबूती और विभिन्न राजस्व स्रोतों के बारे में भी प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में एनडीएमसी के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। इनमें निदेशक (वित्त), मुख्य अभियंता (सिविल), स्वास्थ्य अधिकारी, निदेशक (उद्यान) तथा निदेशक (प्रशिक्षण) शामिल रहे। अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में चल रही नवाचार आधारित योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी साझा की।
स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव ने एनडीएमसी क्षेत्र में संचालित स्वच्छता अभियानों और अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने यांत्रिक सफाई प्रणाली, रात्रिकालीन सफाई अभियान, वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण तथा आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकिल) मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन पहलों के कारण एनडीएमसी क्षेत्र स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल है।
प्रस्तुति के दौरान समुदाय आधारित अनुपम कॉलोनियों के विकास, हरित क्षेत्र विस्तार कार्यक्रमों और व्यापक उद्यानिकी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विद्युत खंभों पर मिस्ट स्प्रेयर लगाए गए हैं, जबकि ई-कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इन पहलों का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है।
एनडीएमसी की डिजिटल और स्मार्ट प्रशासनिक व्यवस्था ने भी विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। अधिकारियों ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) की कार्यप्रणाली को प्रदर्शित करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक के माध्यम से शहर की विभिन्न सेवाओं की निगरानी और प्रबंधन किया जाता है। परिषद द्वारा 49 से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जबकि एनडीएमसी 311 मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नागरिकों को शिकायत निवारण और अन्य सेवाओं की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दौरे के दौरान छह देशों के प्रतिनिधियों ने एनडीएमसी अधिकारियों के साथ संवाद स्थापित किया और विभिन्न प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने शहरी विकास, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रशासन और नागरिक सहभागिता से जुड़े कई प्रश्न पूछे तथा इन पहलों को अपने देशों में लागू करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने एनडीएमसी के उत्कृष्ट शहरी प्रबंधन मॉडल की सराहना करते हुए इसे विकासशील देशों के लिए प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के डॉ. ए.पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय अनुभव-विनिमय कार्यक्रम ज्ञान साझेदारी और वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनडीएमसी द्वारा विकसित मॉडल स्वच्छ, हरित और सतत शहरों के निर्माण के वैश्विक लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के सहयोगात्मक कार्यक्रमों को जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।





