
Saket Court Strike: दिल्ली की अदालतों में वकीलों की हड़ताल, साकेत समेत सभी जिला कोर्ट में कामकाज प्रभावित
दक्षिणी दिल्ली स्थित Saket District Court में गुरुवार को वकीलों की हड़ताल के कारण न्यायिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित रहा। राजधानी की सभी जिला अदालतों के वकील अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन पर बैठे, जिसके चलते कई मामलों की सुनवाई टालनी पड़ी और अदालत परिसरों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं।
हड़ताल का असर केवल साकेत कोर्ट तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली की सातों प्रमुख जिला अदालतों—Patiala House Courts, Rouse Avenue Court Complex, Karkardooma Courts, Tis Hazari Courts, Dwarka Courts और Rohini Courts में भी वकीलों ने प्रदर्शन किया। इन अदालतों में रोजाना हजारों मामलों की सुनवाई होती है और बड़ी संख्या में लोग अपने मुकदमों के लिए पहुंचते हैं।
वकीलों की प्रमुख मांगों में सबसे अहम दीवानी मामलों की आर्थिक क्षेत्राधिकार सीमा बढ़ाना है। वर्तमान नियमों के अनुसार दिल्ली की जिला अदालतों में केवल उन्हीं सिविल मामलों की सुनवाई हो सकती है जिनकी संपत्ति का मूल्य दो करोड़ रुपये तक हो। इससे अधिक मूल्य वाले मामलों को सीधे दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल करना पड़ता है।
वकीलों का कहना है कि वर्ष 2015 में यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये की गई थी, लेकिन पिछले एक दशक में दिल्ली में संपत्तियों की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में अब आर्थिक क्षेत्राधिकार की सीमा बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये की जानी चाहिए ताकि अधिकतर सिविल मामलों की सुनवाई जिला अदालतों में ही हो सके और हाईकोर्ट पर भी बोझ कम हो।
हड़ताल के चलते कई अदालतों में सुनवाई स्थगित करनी पड़ी, जिससे वादकारियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अदालत परिसरों में सामान्य दिनों की तुलना में कम भीड़ दिखाई दी और कई वकील कोर्ट परिसर में प्रदर्शन करते नजर आए।
वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रह सकता है। वहीं अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए इस हड़ताल का असर न्यायिक प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।






