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INS Aridhaman Commissioned: भारतीय नौसेना को मिली तीसरी परमाणु पनडुब्बी, बढ़ी समुद्री ताकत

INS Aridhaman Commissioned: भारतीय नौसेना को मिली तीसरी परमाणु पनडुब्बी, बढ़ी समुद्री ताकत

भारत की समुद्री सुरक्षा को एक और बड़ी मजबूती मिली है। स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया है। राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में आयोजित समारोह में इसे कमीशन किया। इसके साथ ही भारत की सामरिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी मानी जा रही है।

INS अरिदमन अरिहंत श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी है, जिसे प्रोजेक्ट ATV (Advanced Technology Vessel) के तहत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। यह पनडुब्बी भारत की परमाणु त्रि-आयामी रक्षा प्रणाली यानी ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ को और मजबूत करती है, जिससे देश की रणनीतिक निवारक क्षमता (Deterrence) और प्रभावी हो जाती है।

इस पनडुब्बी का निर्माण Larsen & Toubro (एलएंडटी) की मदद से विशाखापट्टनम के सीक्रेट शिपबिल्डिंग सेंटर में किया गया है। महीनों तक समुद्री परीक्षणों के बाद इसे नौसेना में शामिल किया गया। अब यह भारतीय नौसेना के रणनीतिक बल कमान के तहत अपनी अन्य सहयोगी पनडुब्बियों के साथ तैनात होगी।

राजनाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि ‘अरिदमन’ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारत की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लगातार अपनी समुद्री ताकत को मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी चुनौती का सामना मजबूती से किया जा सके।

INS अरिदमन की खासियत यह है कि यह परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है, जिससे यह लंबे समय तक समुद्र के अंदर रह सकती है और दुश्मनों की नजर से बचकर रणनीतिक मिशन को अंजाम दे सकती है। यह बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने में सक्षम है, जो इसे भारत की सुरक्षा के लिए बेहद अहम बनाता है।

इसके साथ ही रक्षा मंत्री ने स्वदेशी युद्धपोत INS तारागिरी को भी नौसेना के बेड़े में शामिल किया। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, INS अरिदमन के शामिल होने से भारत की समुद्री रक्षा क्षमता कई गुना बढ़ गई है। यह पनडुब्बी न केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन करेगी।

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