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Masood Azhar: FATF बैठक से पहले पाकिस्तान का बड़ा कदम, मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में जैश सरगना का नाम; इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये किया

Masood Azhar: FATF बैठक से पहले पाकिस्तान का बड़ा कदम, मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में जैश सरगना का नाम; इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये किया

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को अपनी 2026 की मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल करते हुए उस पर घोषित इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) की अपडेटेड ‘रेड बुक’ में मसूद अजहर को फरार घोषित किया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसी टाइमिंग के कारण पाकिस्तान की इस कार्रवाई के पीछे अंतरराष्ट्रीय दबाव और FATF की निगरानी से बचने की कोशिश को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मसूद अजहर भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल है और जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान से उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग करता रहा है।

पाकिस्तान की ओर से जारी नई सूची में मसूद अजहर का नाम शामिल होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्लामाबाद पिछले कई वर्षों से यह दावा करता रहा है कि वह पाकिस्तान में मौजूद नहीं है।

पाकिस्तान 2021 से मसूद अजहर के देश में नहीं होने की बात कहता रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों की तरफ से दावा किया जाता रहा कि वह अफगानिस्तान चला गया है।

हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पाकिस्तान के इन दावों को खारिज करती रही है। ऐसे में मसूद अजहर के वास्तविक ठिकाने को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के दावे एक-दूसरे से अलग रहे हैं।

अब FIA की नई रेड बुक में मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल करने और उसके खिलाफ इनाम बढ़ाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तान ने अचानक उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रदर्शन क्यों तेज किया है।

इसका सबसे बड़ा कारण FATF की आगामी बैठक को माना जा रहा है। FATF दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए देशों की व्यवस्था और कार्रवाई की समीक्षा करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था है।

पाकिस्तान पहले FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। लंबे समय तक निगरानी में रहने के बाद अक्टूबर 2022 में उसे ग्रे लिस्ट से बाहर किया गया था।

अब पाकिस्तान के सामने चुनौती यह दिखाने की है कि वह आतंकवादी संगठनों, आतंकियों और उनके वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी रखे हुए है।

इसी कारण मसूद अजहर का नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करने की टाइमिंग महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों में इस कदम को अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है।

पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर घोषित इनाम भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दिया है। इससे पहले भी उसके खिलाफ इनाम घोषित किया गया था, लेकिन अब राशि बढ़ाकर कार्रवाई को और गंभीर दिखाने की कोशिश की गई है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि पाकिस्तान लंबे समय से मसूद अजहर के देश में नहीं होने का दावा करता रहा है तो अब उसकी अपनी मोस्ट वांटेड सूची में उसे प्रमुखता से शामिल करने का क्या आधार है।

मसूद अजहर का नाम भारत में कई बड़े आतंकी मामलों से जुड़ता रहा है। जैश-ए-मोहम्मद पर भारत में कई आतंकवादी हमलों को अंजाम देने का आरोप है।

मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र भी वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है। भारत ने उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय तक कूटनीतिक अभियान चलाया था।

पाकिस्तान की नई रेड बुक में केवल मसूद अजहर का नाम ही महत्वपूर्ण नहीं है। इसमें 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले से जुड़े कई वांछित आरोपियों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

नई सूची में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 11 ऐसे लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं, जिन पर मुंबई हमले के आतंकियों को समुद्री रास्ते से भारत पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है।

इन आरोपियों पर हमलावरों को नावों के जरिए मुंबई तक पहुंचाने की साजिश में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।

इसके अलावा सूची में छह ऐसे आरोपियों के नाम भी शामिल हैं, जिन पर मुंबई हमले के लिए आर्थिक और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने में भूमिका निभाने का आरोप है।

FIA के मुताबिक 26/11 मुंबई हमले से जुड़े ये 17 आरोपी करीब 18 वर्षों से फरार हैं। दूसरी तरफ भारतीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां लंबे समय से पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग करती रही हैं।

यही वजह है कि पाकिस्तान की नई रेड बुक को केवल घरेलू आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भी चर्चा में आए थे। भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख ठिकाने मरकज सुभानअल्लाह को निशाना बनाया गया था।

भारत के मुताबिक यह परिसर जैश की गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल था। बहावलपुर लंबे समय से जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क के संदर्भ में चर्चा में रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी मसूद अजहर और उसके संगठन की गतिविधियों को लेकर कई जानकारियां सामने आई थीं। इसके कारण पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे।

अब अक्टूबर में FATF की बैठक से पहले पाकिस्तान की कोशिश अपनी आतंकवाद विरोधी कार्रवाई को प्रभावी दिखाने की मानी जा रही है।

FATF के लिए केवल आतंकियों की सूची तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने, संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने, संपत्तियां जब्त करने और कानूनी कार्रवाई को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने जैसे कदम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे में मसूद अजहर का नाम रेड बुक में शामिल किए जाने के बाद नजर इस बात पर रहेगी कि पाकिस्तान उसके खिलाफ वास्तविक स्तर पर क्या कार्रवाई करता है।

यदि मसूद अजहर को केवल मोस्ट वांटेड घोषित किया जाता है, लेकिन उसकी गिरफ्तारी या उसके संगठन के वित्तीय और ऑपरेशनल नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो पाकिस्तान के कदम पर सवाल बने रह सकते हैं।

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान की स्थिति पहले भी विवादों में रही है। एक तरफ वह उसके पाकिस्तान में मौजूद नहीं होने की बात कहता रहा है, जबकि दूसरी तरफ भारत लगातार आरोप लगाता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क पाकिस्तान की जमीन से सक्रिय है।

पाकिस्तान के इस कदम के पीछे FATF का दबाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रे लिस्ट में शामिल होने से किसी देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। विदेशी निवेश, बैंकिंग व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन पर इसका अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है।

पाकिस्तान आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में वह FATF की ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल होने जैसी किसी भी स्थिति से बचना चाहेगा।

मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल करने और इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये करने के कदम को इसी व्यापक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।

हालांकि पाकिस्तान की कार्रवाई कितनी प्रभावी है, इसका आकलन केवल रेड बुक में नाम डालने से नहीं किया जा सकता। असली परीक्षा इस बात की होगी कि उसके खिलाफ कानूनी और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई जमीन पर कितनी आगे बढ़ती है।

फिलहाल पाकिस्तान ने मसूद अजहर को अपनी मोस्ट वांटेड सूची में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का संदेश देने की कोशिश की है। लेकिन उसके पुराने दावों और अक्टूबर में होने वाली FATF बैठक की टाइमिंग ने इस कदम के वास्तविक उद्देश्य को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।

 

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