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World Health Day | खतरा खामोश है: “नॉर्मल” रिपोर्ट के बावजूद दिल हो सकता है बीमार

World Health Day | खतरा खामोश है: “नॉर्मल” रिपोर्ट के बावजूद दिल हो सकता है बीमार

इस World Health Day पर वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन और हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ Dr. Rahul Chandola ने एक सख्त चेतावनी दी है—अब वक्त है कि हम बीमारी का इंतजार करने के बजाय उसे पहले ही रोकना सीखें। आज भी हेल्थकेयर का बड़ा हिस्सा लक्षण आने के बाद शुरू होता है, जबकि हकीकत यह है कि सिर्फ 5% हेल्थ मैनेजमेंट अस्पतालों में होता है, बाकी खतरा हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में धीरे-धीरे बनता रहता है।

भारत में स्थिति और भी गंभीर है। आंकड़े बताते हैं कि 80% लोगों को पहला हार्ट अटैक आने से पहले हाई-रिस्क के तौर पर पहचाना ही नहीं गया। अधिकतर लोग “लो” या “इंटरमीडिएट” रिस्क में थे—यानी खतरा मौजूद था, लेकिन दिख नहीं रहा था। यही वजह है कि दिल की बीमारियां अब कम उम्र—करीब 54 साल—में और तेजी से युवाओं में भी सामने आ रही हैं।

एक और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है—जिम या हैवी वर्कआउट के दौरान अचानक हार्ट अटैक। अक्सर इसके पीछे छिपी हुई या अनडायग्नोज्ड हार्ट कंडीशंस होती हैं, जो भारी एक्सरसाइज के दबाव में खतरनाक रूप ले लेती हैं। डॉ. चंदोला की साफ सलाह है—कोई भी इंटेंस फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले हार्ट स्क्रीनिंग जरूर कराएं।

समस्या यह भी है कि रूटीन टेस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। ECG सिर्फ कुछ सेकंड की झलक देता है और Echo दिल की कार्यक्षमता तो दिखाता है, लेकिन ब्लॉकेज को सही तरीके से पकड़ नहीं पाता। यानी रिपोर्ट “नॉर्मल” होने के बावजूद अंदर गंभीर समस्या छिपी हो सकती है।

यही कारण है कि अब फोकस प्रिवेंटिव और कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग पर जाना जरूरी है। iLive Connect जैसी आधुनिक तकनीकें रियल-टाइम में दिल की हर गतिविधि को ट्रैक करती हैं—नींद, स्ट्रेस, एक्सरसाइज—ताकि खतरे का पहले ही पता चल सके और समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।

इस World Health Day पर संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—
दिल की बीमारी अचानक नहीं होती, वह धीरे-धीरे बनती है। सवाल यह है—क्या आप समय रहते उसे पहचान पाएंगे?

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