
US Israel Iran War: हमलों में 787 मौतें, खामेनेई की मौत से मिडिल ईस्ट में भड़की जंग
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने भयावह रूप ले लिया है। ईरान की सरकारी मीडिया और ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार अमेरिकी-इजरायली हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 787 हो गई है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरी दुनिया की नजरें अब इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल और अमेरिका के ताबड़तोड़ हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई है। खामेनेई की मौत ने क्षेत्रीय तनाव को और भड़का दिया है। हालांकि आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि का इंतजार है, लेकिन इस दावे ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है।
इस युद्ध में Israel और United States की ओर से ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल हमले किए जा रहे हैं। जवाब में Iran ने भी जोरदार पलटवार किया है। ईरान ने न केवल इजरायल बल्कि खाड़ी के उन देशों को भी निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
दुबई, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों के आसमान में मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बाद लाल चमक दिखाई देने की खबरें हैं। कई स्थानों पर धमाकों और आग लगने की सूचनाएं सामने आई हैं। रियाद में अमेरिकी दूतावास के पास विस्फोट और आग लगने की भी रिपोर्ट है। इस बीच व्हाइट हाउस से राष्ट्रपति Donald Trump की सख्त चेतावनी ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
इजरायल की थल सेना के लेबनान में घुसने और कई चौकियों पर कब्जा करने की खबरों ने संघर्ष को और व्यापक बना दिया है। वहीं, हिजबुल्लाह के भी इस जंग में सक्रिय होने और इजरायल पर मिसाइल-ड्रोन हमले करने की रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं।
एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि तेहरान में हजारों सीसीटीवी कैमरे कथित रूप से हैक थे और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस युद्ध का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के कारण सीबीएसई की परीक्षाएं भी स्थगित की गई हैं। भारत का विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
मौजूदा हालात में युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता दिख रहा है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। दुनिया भर में शांति की अपीलें तेज हो गई हैं, लेकिन जमीन पर हमलों और पलटवार का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।






