
MP Court Verdict: दतिया विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा, विधायकी पर संकट
मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने जालसाजी मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 1998 के एक एफडी घोटाले में दोषी करार देते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने उन्हें जमानत भी दे दी है।
यह मामला उस समय का है जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने पिता के संस्थान के नाम पर कराई गई करीब 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज को फर्जी दस्तावेजों के जरिए निकाल लिया। अदालत में सुनवाई के दौरान यह आरोप साबित हो गया, जिसके बाद उन्हें आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसी गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया गया।
इस मामले में बैंक के एक कर्मचारी रघुवीर प्रजापति को भी दोषी पाया गया है। कोर्ट ने दोनों को साजिश और वित्तीय अनियमितताओं के तहत सजा सुनाई है। यह फैसला राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर विधायक की सदस्यता पर पड़ सकता है।
नियमों के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी विधानसभा सदस्यता खतरे में आ जाती है। ऐसे में राजेंद्र भारती की विधायकी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि कानून में यह प्रावधान भी है कि यदि दोषी ठहराए गए विधायक 60 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में अपील कर सजा पर स्थगन (स्टे) हासिल कर लेते हैं, तो उनकी सदस्यता बच सकती है।
इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजेंद्र भारती आगे क्या कानूनी कदम उठाते हैं और हाई कोर्ट से उन्हें राहत मिलती है या नहीं।






