
Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा खुलासा, मामूली वेतन वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति ने बढ़ाए सवाल
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान को लेकर उठे कथित गड़बड़ी के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि मंदिर के दानपात्रों से नकदी निकालने और उसकी गिनती करने की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ कर्मचारियों ने चढ़ावे की राशि में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों की आय और उनकी संपत्तियों के बीच भारी अंतर सामने आया। इसके बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
राम मंदिर में प्रतिदिन देश और दुनिया से आने वाले लाखों श्रद्धालु दान के रूप में नकदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं अर्पित करते हैं। यह सभी दान मंदिर परिसर में स्थापित दानपात्रों में जमा होता है। इन दानपात्रों से धनराशि निकालने और उसकी गिनती करने की जिम्मेदारी कुछ चयनित कर्मचारियों को सौंपी गई थी। अब जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी प्रक्रिया के दौरान चढ़ावे की रकम में अनियमितताएं हुईं।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कथित भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनके बयान के बाद यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई।
जांच में सबसे अधिक चर्चा उन कर्मचारियों को लेकर हो रही है जिनकी मासिक आय लगभग 18 से 20 हजार रुपये बताई जा रही है, लेकिन उनके नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति सामने आई है। जांच एजेंसियों के अनुसार एक कर्मचारी ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की जमीन खरीदी, जबकि दूसरे कर्मचारी ने लगभग 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया। सीमित वेतन के बावजूद इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित होने से संदेह गहरा गया और जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
इस मामले में लवकुश मिश्रा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। वह अयोध्या के निकट रुदौली क्षेत्र के मीनापुर फगौली गांव का निवासी बताया जाता है और उसकी जिम्मेदारी दानपात्रों से नकदी निकालने तथा उसकी गिनती करने की थी। जांच टीम द्वारा उसके घर पर की गई तलाशी में लगभग 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। रिपोर्टों के अनुसार कुछ रकम घर की अलमारी में रखी हुई थी, जबकि कुछ नकदी गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी। इसके बाद उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
हालांकि लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि बरामद नकदी उनकी खेती की जमीन गिरवी रखकर जुटाई गई थी और बेटे का कथित निर्माणाधीन मकान से कोई संबंध नहीं है। बावजूद इसके जांच एजेंसियां सभी तथ्यों की पुष्टि करने में जुटी हुई हैं।
विशेष अभियान समूह (SOG) और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और वित्तीय रिकॉर्ड की भी गहन पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने SIT का गठन किया। इस जांच दल की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है, जबकि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को सदस्य बनाया गया है। SIT को सात दिनों में प्रारंभिक और पंद्रह दिनों में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Mishra भी अयोध्या पहुंचे और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित है और वे चढ़ावा विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री Surya Pratap Shahi ने कहा कि ट्रस्ट द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वहीं पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता Vinay Katiyar ने भी मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और लंबे संघर्ष का प्रतीक है, इसलिए किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की मांग की है। अयोध्या के पूर्व विधायक Tej Narayan Pandey ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए सभी संबंधित पक्षों को सहयोग करना चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चढ़ावे की राशि में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं और यदि हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।






