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Middle East Crisis: तेल के बाद पानी-गैस प्लांट पर हमले, ईरान की नई रणनीति से बढ़ा खतरा

Middle East Crisis: तेल के बाद पानी-गैस प्लांट पर हमले, ईरान की नई रणनीति से बढ़ा खतरा

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए अब तेल ठिकानों के साथ-साथ पानी और गैस जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता और तनाव चरम पर पहुंच गया है।

ताजा घटनाओं में अबू धाबी और कुवैत में बड़े हमलों की खबर सामने आई है। अबू धाबी में हबशन गैस फैसिलिटी के पास एयर डिफेंस सिस्टम ने एक हमले को इंटरसेप्ट कर दिया, लेकिन इसके बाद गिरे मलबे से आग लग गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत प्लांट का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

वहीं कुवैत में हालात ज्यादा गंभीर नजर आए, जहां एक बड़े वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया। इस हमले में प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। कुवैत की लगभग 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति ऐसे ही प्लांट्स पर निर्भर करती है, ऐसे में यह हमला सीधे आम नागरिकों की जिंदगी पर असर डाल सकता है।

इसके अलावा कुवैत के मीना अल-अहमदी ऑयल रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले किए गए, जिससे कई जगह आग लग गई। दमकल विभाग आग बुझाने में जुटा है। खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों में भी खतरा बना हुआ है। बहरीन में सायरन बजे, सऊदी अरब ने कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात में भी एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है।

यह संघर्ष अब अमेरिका और इज़रायल के साथ जारी टकराव के बीच और गहराता जा रहा है। लगातार हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के चलते हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।

सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। इस रास्ते पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर बैठक करने जा रही है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा होगी।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बदलती रणनीति और बढ़ते हमलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर न केवल खाड़ी देशों बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।

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