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Artemis II Splashdown: 10 दिन की चंद्र यात्रा के बाद सुरक्षित लौटे अंतरिक्ष यात्री, इतिहास रचकर पृथ्वी पर वापसी

Artemis II Splashdown: 10 दिन की चंद्र यात्रा के बाद सुरक्षित लौटे अंतरिक्ष यात्री, इतिहास रचकर पृथ्वी पर वापसी

NASA के ऐतिहासिक Artemis II मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख दिया है। 10 दिनों की लंबी और चुनौतीपूर्ण चंद्र यात्रा के बाद चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए। उनका Orion spacecraft कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन हुआ, जिसने इस मिशन को पूरी तरह सफल बना दिया।

यह मिशन इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले लगभग 50 वर्षों में पहली बार इंसानों ने चंद्रमा के पास जाकर उसकी परिक्रमा की है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने करीब 11.16 लाख किलोमीटर की दूरी तय की और पृथ्वी से सबसे दूर पहुंचने का नया रिकॉर्ड भी बनाया।

आर्टेमिस II नासा का पहला क्रूड टेस्ट फ्लाइट था, जिसे 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के केप कैनवरल से एसएलएस रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के बाद चंद्रमा की ओर बढ़ते हुए उसके बेहद करीब जाकर परिक्रमा की। उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को भी देखा, जिसे ‘फार साइड’ कहा जाता है और जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।

इस मिशन में विविधता और समावेशन की भी झलक देखने को मिली। इसमें एक महिला, एक ब्लैक एस्ट्रोनॉट और एक गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, जिसने इसे ऐतिहासिक बना दिया। कमांडर Reid Wiseman, पायलट Victor Glover, मिशन स्पेशलिस्ट Christina Koch और कनाडा के Jeremy Hansen ने इस मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

स्प्लैशडाउन का चरण इस मिशन का सबसे जोखिम भरा हिस्सा था। जब ओरियन कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कर रहा था, तब उसकी गति लगभग 39 हजार किलोमीटर प्रति घंटे थी। वायुमंडल के साथ घर्षण के कारण कैप्सूल के बाहरी हिस्से का तापमान करीब 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस दौरान प्लाज्मा की एक परत बन गई, जिसने कुछ समय के लिए रेडियो संपर्क को बाधित कर दिया। यह पूरा चरण बेहद तनावपूर्ण था, लेकिन कैप्सूल की हीट शील्ड ने सफलतापूर्वक इस परीक्षा को पास कर लिया।

जैसे ही कैप्सूल वायुमंडल के निचले हिस्से में पहुंचा, पैराशूट के दो सेट खुल गए, जिससे उसकी गति धीरे-धीरे कम होकर लगभग 24 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई। इसके बाद कैप्सूल सुरक्षित रूप से प्रशांत महासागर में उतर गया। नासा और अमेरिकी नौसेना की टीमों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और करीब एक घंटे के भीतर सभी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए रिकवरी शिप तक ले जाया गया, जहां उनका प्रारंभिक मेडिकल परीक्षण किया गया।

यह मिशन नासा के बड़े आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों को उतारना और वहां स्थायी बेस स्थापित करना है। इससे आगे चलकर मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी की जाएगी। 2022 में हुए Artemis I के बाद यह दूसरा महत्वपूर्ण कदम था, जिसने एसएलएस रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट की विश्वसनीयता को साबित किया है।

आर्टेमिस II की सफलता ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के जरिए अंतरिक्ष की सबसे कठिन चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है। यह मिशन न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

अब दुनिया की नजरें आर्टेमिस III मिशन पर टिकी हैं, जिसमें 2028 तक चंद्रमा पर मानव लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया है। आर्टेमिस II की यह ऐतिहासिक सफलता मानवता के अंतरिक्ष सफर को एक नई दिशा देने वाली साबित हो रही है।

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