
School Audit: नोएडा में तीन स्कूलों का जायजा लेने पहुंचे सौरव दास, तीनों जगह टीम को नहीं मिली एंट्री
नोएडा। सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए अभियान चला रहे सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास मंगलवार को गौतमबुद्ध नगर के तीन स्कूलों में पहुंचे। टीम ने देवला, मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर स्थित सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को देखने की कोशिश की, लेकिन तीनों ही स्थानों पर उन्हें स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। इसके बाद स्कूलों के निरीक्षण को लेकर विवाद की स्थिति बन गई।
सीजेपी की टीम का कहना है कि वह सरकारी स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए इन स्कूलों में पहुंची थी। टीम स्कूल भवन, कक्षाओं, शौचालय, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को देखना चाहती थी। हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से टीम को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
देवला स्थित स्कूल के बाहर पुलिस की मौजूदगी भी देखी गई। टीम के सदस्यों ने स्कूल के शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों से अंदर प्रवेश नहीं दिए जाने का कारण जानने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें बताया गया कि बाहरी लोगों को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं देने के संबंध में अधिकारियों से निर्देश मिले हैं।
सौरव दास ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी टीम का उद्देश्य स्कूल में पढ़ाई बाधित करना नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति को देखना है। उनका कहना था कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी सामने आनी चाहिए और इसी उद्देश्य से टीम अलग-अलग स्कूलों का दौरा कर रही है।
इससे पहले भी सीजेपी की टीम ने नोएडा के गढ़ी चौखंडी स्थित एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया था। वहां टीम ने स्कूल परिसर और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान स्कूल की व्यवस्थाओं से संबंधित कुछ सवाल उठाए गए थे। इसके बाद टीम ने जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में भी पहुंचने की कोशिश की।
मंगलवार को तीन स्कूलों में प्रवेश नहीं मिलने के बाद मामला और चर्चा में आ गया। सीजेपी की टीम और स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर बहस हुई। कुछ स्थानीय लोगों ने बाहरी लोगों के स्कूल में पहुंचकर निरीक्षण करने पर आपत्ति जताई। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बनने की भी जानकारी सामने आई है।
सीजेपी का कहना है कि उसका अभियान सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को समझने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। टीम के अनुसार, स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को सीधे मौके पर जाकर देखना जरूरी है। इसी क्रम में अलग-अलग इलाकों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया जा रहा है।
वहीं, शिक्षा विभाग का कहना है कि स्कूलों में लोगों के प्रवेश को लेकर व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। गौतमबुद्ध नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार के अनुसार, स्कूलों में सामान्य रूप से प्रवेश पर कोई रोक नहीं है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से टीम को स्कूल परिसर में प्रवेश देने से रोका गया।
शिक्षा विभाग और सीजेपी के बीच स्कूलों के निरीक्षण को लेकर पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के बाद सीजेपी की ओर से स्कूलों को बंद किए जाने से संबंधित दावा किया गया था। शिक्षा विभाग ने उस दावे को गलत बताते हुए कहा था कि जिले के सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं और स्कूलों को बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
मंगलवार की घटना के बाद अब सरकारी स्कूलों में बाहरी टीमों के निरीक्षण और उनके प्रवेश की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर सीजेपी स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने के अधिकार और जरूरत की बात कर रही है, वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए निर्धारित व्यवस्था और बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखना जरूरी है।
फिलहाल देवला, मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर के स्कूलों में सीजेपी टीम को प्रवेश नहीं मिल सका। मामले को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी बातें सामने आई हैं। स्कूलों में निरीक्षण को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के नियमित संचालन की बात कही है।






