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Digital Arrest Fraud: रिटायर्ड आर्मी कर्नल से 15.50 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने पंजाब-राजस्थान से 4 आरोपी दबोचे; कंबोडिया-दुबई तक नेटवर्क के तार

Digital Arrest Fraud: रिटायर्ड आर्मी कर्नल से 15.50 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने पंजाब-राजस्थान से 4 आरोपी दबोचे; कंबोडिया-दुबई तक नेटवर्क के तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को पंजाब और राजस्थान से गिरफ्तार किया है। इस मामले में मुनिरका एन्क्लेव निवासी भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल से 15 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई थी। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी साइबर अपराधियों को म्यूल और करंट बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके तार कंबोडिया और UAE-दुबई में सक्रिय साइबर फ्रॉड ऑपरेटरों से जुड़े होने की बात जांच में सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लुधियाना निवासी 38 वर्षीय सरबजीत, 30 वर्षीय सूरज, 32 वर्षीय संदीप और राजस्थान के सीकर निवासी नरेश उर्फ लक्की के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार स्मार्टफोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं, जिनका कथित तौर पर साइबर अपराधों में इस्तेमाल किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, सेवानिवृत्त आर्मी कर्नल ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 15.50 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता मुनिरका एन्क्लेव, नई दिल्ली में रहते हैं। घटना की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को हुई, जब पीड़ित के पास एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि महाराष्ट्र पुलिस के आदेश पर उनका टेलीफोन कनेक्शन बंद किया जाने वाला है।

इसके बाद पीड़ित को दूसरे नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा गया। वहां एक व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि पीड़ित की निजी जानकारी का इस्तेमाल मुंबई में एक अवैध बैंक खाता खोलने के लिए किया गया है। जालसाजों ने कथित बैंक खाते को मनी लॉन्ड्रिंग, निवेश धोखाधड़ी और आतंकी वित्तपोषण जैसे गंभीर मामलों से जोड़कर पीड़ित को डराना शुरू कर दिया।

पुलिस के अनुसार, जालसाजों ने अपनी कहानी को विश्वसनीय बनाने के लिए पीड़ित को कई फर्जी दस्तावेज भी भेजे। इनमें कथित ED गिरफ्तारी वारंट, अदालत से जुड़े दस्तावेज, अग्रिम जमानत से संबंधित फर्जी दस्तावेज और बॉम्बे हाईकोर्ट तथा RBI के नाम से तैयार किए गए कथित फर्जी पत्र शामिल थे।

इसके बाद जालसाजों ने सेवानिवृत्त कर्नल और उनकी पत्नी को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की बात कही। लगातार मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उनसे उनकी संपत्तियों और वित्तीय स्थिति से जुड़ी जानकारी हासिल की गई। इसके बाद कथित RBI निर्देशों के नाम पर पीड़ित को 15 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।

ठगी का पता चलने के बाद मामले में 19 अप्रैल 2026 को साइबर पुलिस स्टेशन, दक्षिण-पश्चिम जिला में ई-FIR नंबर 165/26 दर्ज की गई। मामला BNS की धारा 308, 318(4), 319 और 340 के तहत दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई।

मामले की जांच के लिए SI सोमबीर, HC जितेंद्र, HC पुनीत, HC मयूरपाल और HC संदीप की विशेष टीम गठित की गई। टीम ने साइबर थाना दक्षिण-पश्चिम जिले के SHO इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक की निगरानी और ACP ऑपरेशंस संदीप घई के पर्यवेक्षण में जांच आगे बढ़ाई। पुलिस ने मनी ट्रेल, लाभार्थी बैंक खातों, डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया।

जांच में पीड़ित से ठगे गए 15.50 लाख रुपये लुधियाना के एक करंट बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होने का पता चला। यह बैंक खाता आरोपी सरबजीत के नाम पर बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सरबजीत ने अपना करंट अकाउंट सूरज को देने की बात बताई। सूरज तक पहुंच बनाने में संदीप की कथित भूमिका सामने आई, जो संबंधित बैंक में कर्मचारी था।

जांच में पुलिस को पता चला कि सूरज ने कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए नरेश उर्फ लक्की से संपर्क किया था। इसके बाद सरबजीत, सूरज और संदीप जयपुर गए और बैंक खाते से संबंधित किट नरेश उर्फ लक्की तक पहुंचाई गई। पुलिस का आरोप है कि नरेश ने इस बैंक खाते को आगे साइबर फ्रॉड सिंडिकेट तक पहुंचाया।

इन जानकारियों के आधार पर पुलिस टीम ने राजस्थान में छापेमारी कर नरेश उर्फ लक्की को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उसने टेलीग्राम के माध्यम से सूरज से करंट बैंक अकाउंट हासिल करने और इन्हें कंबोडिया तथा UAE-दुबई में मौजूद कथित साइबर फ्रॉड ऑपरेटरों तक पहुंचाने की बात बताई।

इस खुलासे के बाद पुलिस को स्थानीय बैंक खाताधारकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड ऑपरेटरों तक कथित सप्लाई चेन का पता चला। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

सबसे महत्वपूर्ण खुलासा लाभार्थी बैंक खाते की जांच में हुआ। पुलिस के मुताबिक, इस बैंक खाते का संबंध नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 17 शिकायतों से मिला है। ये शिकायतें देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दर्ज कराई गई थीं और इनसे जुड़े संदिग्ध लेनदेन की रकम करोड़ों रुपये में बताई गई है।

पुलिस का कहना है कि इससे संकेत मिला कि आरोपी केवल एक ठगी के मामले तक सीमित नहीं थे, बल्कि साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के लिए व्यवस्थित तरीके से म्यूल और करंट बैंक अकाउंट जुटाने तथा उपलब्ध कराने वाले बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। जांच अब अंतिम लाभार्थियों की पहचान और पूरे मनी ट्रेल को ट्रेस करने की दिशा में आगे बढ़ाई जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, सरबजीत उस करंट बैंक अकाउंट का खाताधारक था जिसमें रिटायर्ड कर्नल से ठगे गए 15.50 लाख रुपये पहुंचे थे। सूरज की भूमिका स्थानीय स्तर पर करंट अकाउंट हासिल कर उन्हें आगे पहुंचाने वाले कथित बिचौलिए के रूप में सामने आई है। संदीप संबंधित बैंक में कार्यरत था और उस पर अपने बैंकिंग संपर्कों और जानकारी का इस्तेमाल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने में मदद के लिए करने का आरोप है।

वहीं, नरेश उर्फ लक्की को पुलिस इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है। आरोप है कि वह टेलीग्राम के जरिए घरेलू स्तर पर बैंक खाते हासिल करता था और उन्हें कंबोडिया तथा UAE-दुबई से जुड़े साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था।

पुलिस जांच में एक कथित कमीशन आधारित मॉडल भी सामने आया है। इसमें ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी जो कमीशन के बदले अपना करंट बैंक अकाउंट दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए देने को तैयार हों। इसके बाद खातों को अलग-अलग बिचौलियों के माध्यम से आगे भेजा जाता और अंततः विदेश से संचालित बताए जा रहे साइबर फ्रॉड नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में पीड़ितों से ठगी गई रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किए जाने का आरोप है।

दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने आरोपियों से चार मोबाइल फोन और छह सिम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, टेलीग्राम संपर्कों, बैंक खातों और संभावित विदेशी ऑपरेटरों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने कितने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए, इन खातों के जरिए कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और ठगी की रकम आखिरकार किन लोगों तक पहुंची। मामले की आगे की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

 

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