
Book Launch: राष्ट्र निर्माण और युवा चेतना का संदेश, ‘जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है’ पुस्तक का लोकार्पण
नई दिल्ली। राष्ट्र चेतना, युवा प्रेरणा और सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक ‘जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है!’ का भव्य लोकार्पण समारोह गुरुवार को नई दिल्ली के झंडेवालान स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार, केशव कुंज में आयोजित किया गया। सुरुचि प्रकाशन के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा और राष्ट्र जीवन से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने भाग लिया।
समारोह के दौरान पुस्तक का विधिवत लोकार्पण किया गया और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, भारतीय संस्कृति, सेवा, संस्कार तथा सामाजिक दायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, अधिवक्ता, विद्यार्थी, साहित्यकार और समाजसेवी उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज तिवारी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी होती है। उन्होंने युवाओं से केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहने और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक युवाओं में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना को मजबूत करने वाली प्रेरणादायी कृति है।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख राजकुमार मटाले ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति सेवा, समर्पण और संस्कारों पर आधारित है। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए विचार और व्यवहार दोनों का सशक्त होना आवश्यक है।
पुस्तक के लेखक एवं समाजसेवी ई. चंद्रशेखर पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक लिखने का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, आत्मविश्वास, कर्तव्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को जागृत करना है। उन्होंने कहा कि भारत का अमृतकाल तभी सफल होगा, जब युवा अपनी ऊर्जा, प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग राष्ट्र और समाज के विकास में करेंगे।
कार्यक्रम में लेखक एवं विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. प्रवेश कुमार ने पुस्तक की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार सशक्त विचार और संस्कारित युवा हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे साहित्य की आवश्यकता है जो युवाओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करे।
सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली, प्रबंध निदेशक रजनीश जिन्दल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंकुर पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रकाशन संस्थान भविष्य में भी राष्ट्रीय चेतना और मूल्यपरक साहित्य के प्रकाशन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एन. प्रदीप शर्मा तथा पूर्व कुलपति डॉ. ए.डी.एन. वाजपेयी ने भी अपने विचार साझा किए और कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े साहित्य का व्यापक प्रसार समय की आवश्यकता है। उन्होंने पुस्तक को युवाओं के लिए उपयोगी और प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीरज कर्ण सिंह और प्रकृति शर्मा ने किया। समारोह के अंत में पुस्तक हस्ताक्षर सत्र का आयोजन किया गया, जहां उपस्थित लोगों ने लेखक से संवाद किया और पुस्तक की प्रतियों का अवलोकन किया। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति, साहित्य और सामाजिक चेतना का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला।






