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Mamata Banerjee FIR: कथित हेट स्पीच मामले में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

Mamata Banerjee FIR: कथित हेट स्पीच मामले में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख Mamata Banerjee के खिलाफ कथित हेट स्पीच मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला लगभग दो महीने पुराने एक भाषण से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें उन पर सांप्रदायिक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनके बयान से समाज में धार्मिक आधार पर तनाव और नफरत फैलाने की कोशिश हुई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला कोलकाता में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित भाषण से संबंधित है। आरोप है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाला बताया है।

कोलकाता पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196(1), 351(2) और 352 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। प्रारंभिक स्तर पर यह मामला ‘जीरो एफआईआर’ के रूप में दर्ज किया गया और बाद में आगे की जांच के लिए हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर दिया गया।

शिकायत में कहा गया है कि ममता बनर्जी के कथित बयान से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हुआ और इससे विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा होने की आशंका बनी। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज कर दी है। Kiren Rijiju ने 27 मई 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर ममता बनर्जी के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि यह बयान बेहद आपत्तिजनक और चिंताजनक प्रतीत होता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई थी।

वहीं, इस घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव Abhishek Banerjee का नाम भी चर्चा में आया है। इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके कुछ कथित आक्रामक बयानों को लेकर भी एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

हालांकि, ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस एफआईआर पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और उचित समय पर अपना पक्ष रखेंगे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की जांच के दौरान पुलिस भाषण की रिकॉर्डिंग, वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितना दम है और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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